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🔴 बस्तर में शिक्षा का संकट: 978 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे, बीजापुर के 12 स्कूलों में शिक्षक का टोटा! 📚✋

ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में नक्सल मुक्त होने के बाद शिक्षा व्यवस्था की हालत चिंतनीय

रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलियों का सफाया करने का संकल्प लिया। इस अहम घोषणा के एक दिन पहले संसद में उन्होंने बस्तर के नक्सल मुक्त होने की बात कही। इससे उम्मीद है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई किरणें फूटेंगी और शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लौट आएगी।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की परेशानी

पिछले कुछ वर्षों में नक्सलियों के प्रभाव में कमी आई है, जिसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार ने विद्यालयों के पुनर्निमाण की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन एक हालिया रिपोर्ट में बस्तर संभाग के स्कूलों की स्थिति चिंता पैदा कर रही है। बीजापुर जिले में स्थिति सबसे खराब है, जहां 324 स्कूलों में केवल एक शिक्षक पदस्थ है। यदि शिक्षक अवकाश पर जाता है, तो स्कूल बंद हो जाता है। अन्य जिलों जैसे बस्तर, कांकेर, और दंतेवाड़ा में भी यह स्थिति जानलेवा बनी हुई है।

अन्य आदिवासी जिलों में भी शिक्षकों की कमी

छत्तीसगढ़ के अन्य आदिवासी क्षेत्रों में भी शिक्षा अव्यवस्था चिंता का विषय है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में 113 स्कूलों में एक ही शिक्षक है और पांच स्कूल पूरी तरह से शिक्षकविहीन हैं। इसी तरह जशपुर, सूरजपुर और कोरिया जिलों में भी स्थिति अच्छी नहीं है। हालात की गंभीरता को देखते हुए, राज्य सरकार को अतिशेष शिक्षकों की संख्या को ध्यान में रखते हुए इस बُख़्त का समाधान खोजना आवश्यक है।

राजधानी रायपुर की स्थिति

राजधानी रायपुर की शिक्षा व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। यहां कई स्कूल ऐसे हैं जो केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि रायपुर जिले में 304 अतिशेष शिक्षक पदस्थ हैं। महासमुंद, धमतरी, और दुर्ग जैसे जिलों में भी स्थिति किसी से कम नहीं है। नक्सल प्रभावित जिले मानपुर मोहला अंबागढ़ चौकी में भी 149 स्कूलों में महज एक शिक्षक है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन के प्रयासों के बावजूद, शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति चिंता का विषय है। राज्य सरकार को शीघ्र ही इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि बच्चों का भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। बस्तर से लेकर राजधानी तक, स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आई है। इसे सुधारने के लिए आवश्यक उपायों की तत्काल आवश्यकता है ताकि हर बच्चे को गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके।

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