ब्रेकिंग न्यूज़: भारत की एमएसएमई ऊर्जा खपत पर नई रिपोर्ट आई सामने
भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) पर एक नई रिपोर्ट ने चिंता जताई है। ये उद्योग न केवल देश की औद्योगिक ऊर्जा खपत का लगभग 25 प्रतिशत योगदान देते हैं, बल्कि ये देश के उत्पादन का 35.5 प्रतिशत भी उत्पन्न करते हैं।
औद्योगिक ऊर्जा पर एमएसएमई का प्रभाव
गुड बिज़नेस लैब द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में एमएसएमई की ऊर्जा खपत का विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जिसमें मुख्य रूप से वस्त्र染ा प्रक्रिया का जिक्र किया गया है। इस प्रक्रिया में भाप का उपयोग किया जाता है, जिससे ईंधन की विशेष आवश्यकता होती है।
रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता और तिरुपुर जैसे प्रमुख वस्त्र उद्योग क्षेत्रों में 60 से ज्यादा染ा यूनिट्स में ऊर्जा ऑडिट किए गए। इन यूनिट्स की वार्षिक आय आमतौर पर 50 करोड़ रुपये से कम थी, लेकिन ईंधन के उपयोग में भारी अंतर सामने आया। औसतन, प्रत्येक यूनिट हर साल करीब 2000 टन ठोस ईंधन का उपयोग करता है, जिसमें मुख्यतः लकड़ी शामिल है। यह संख्या भारत में संचालित हजारों染ा यूनिट्स के ईंधन उपयोग की व्यापक तस्वीर पेश करती है।
श्रमिकों पर ऊर्जा की तीव्रता का प्रभाव
वस्त्र染ा यूनिट्स में भाप बनाने के लिए अत्यधिक गर्मी का सामना करना पड़ता है, जिससे श्रमिकों पर प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव पड़ सकते हैं। ऑडिट के दौरान देखा गया कि कई यूनिट्स के तापमान 45-50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाते हैं। श्रमिकों को इसके परिणामस्वरूप कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, साथ ही उचित सुरक्षा उपकरणों का अभाव भी चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में पाया गया है कि श्रमिकों को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। अत्यधिक गर्मी के कारण PPE का उपयोग करना असहज होता है। आत्म-सुरक्षा के साधनों का अभाव और बुनियादी सुरक्षा प्रथाओं की कमी उनके जीवन को खतरे में डालती हैं।
ऊर्जा उपयोग की चुनौतियाँ और संभावनाएँ
ऑडिट से यह भी स्पष्ट हुआ कि ऊर्जा की अत्यधिक खपत का एक बड़ा हिस्सा आवश्यकतानुसार कम किया जा सकता है। रिपोर्ट ने बताया कि पुराने तकनीकी उपकरण और उचित रखरखाव के अभाव के कारण ईंधन की अधिक खपत हो रही है। कोलकाता जैसे क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सुलभ और सस्ते परिचालन सुधारों के जरिए 20 प्रतिशत तक बचत की जा सकती है।
हालाँकि, उच्च लागत और सूचना की कमी जैसे तत्वों ने MSME के शीर्ष निर्णय लेने वालों के लिए नई तकनीकों को अपनाने में बाधा डाली है। कई MSME मालिकों ने बताया कि वे ऊर्जा दक्षता के विकल्पों के बारे में जानकारी की कमी महसूस कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि जानकारी का संप्रेषण उनके लिए एक चुनौती है।
इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करने हेतु एक व्यवस्थित और स्थायी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि ऑडिट की सिफारिशें सरल और कार्यान्वयन योग्य हों, ताकि MSME इस दिशा में वास्तविक प्रगति कर सकें।
निष्कर्ष
इस रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एमएसएमई के क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना न केवल उद्योग के लिए लाभदायक होगा, बल्कि यह श्रमिकों की जीवनशैली में भी सुधार लाएगा। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, आवश्यक है कि नीतियों में सुधार और उचित जानकारी के साझा करने के माध्यम से MSMEs को सशक्त बनाया जाए।
