first time in history: क्या वाकई में उपराष्ट्रपति जगदीप को हटा सकते हैं विपक्षी दल?

first time in history: इंडिया ब्लॉक (I.N.D.I.A) आज राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है. इंडिया ब्लॉक ने जगदीप धनकड़ पर कार्यवाही के दौरान पक्षपात करने का आरोप लगाया है. राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ घटक दलों के बीच तल्ख रिश्तों के बीच कई विपक्षी दल उन्हें उपराष्ट्रपति के पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस देने के बारे में विचार कर रहे हैं. बता दें कि पार्टियां संविधान के अनुच्छेद 67B के तहत प्रस्ताव पेश कर सकती है.

वाकई क्या सच में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटा सकते हैं विपक्षी दल?

first time in history सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल राज्यसभा में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं. इंडिया ब्लॉक सदन में पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली का आरोप लगाते हुए राज्यसभा सभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है. पार्टियां संविधान के अनुच्छेद 67(बी) के तहत प्रस्ताव पेश करेंगी. सूत्रों के अनुसार, TMC, आप, SP सहित इंडिया ब्लॉक की सभी पार्टियों ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं.

क्या है उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया?

हालांकि, विपक्षी दलों का यह कदम विफल हो सकता है, क्योंकि संख्या विपक्ष के पक्ष में नहीं है. अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया राज्यसभा में प्रस्ताव पेश करके शुरू की जानी चाहिए. प्रस्ताव को सदन में एक सदस्य द्वारा पेश किया जाना चाहिए और उस दिन सदन में उपस्थित 50 प्रतिशत सदस्यों द्वारा पारित किया जाना चाहिए. यदि प्रस्ताव राज्यसभा से पारित हो जाता है तो इसे स्वीकार किए जाने के लिए लोकसभा द्वारा बहुमत से पारित किया जाना चाहिए. यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 67(बी), 92 और 100 का पालन करती है.

क्या है अनुच्छेद 67(बी)?

first time in history भारतीय संविधान का अनुच्छेद 67(बी) के अनुसार, उपराष्ट्रपति को तभी हटाया जा सकता है, जब राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किए जाने के बाद उसे 50 प्रतिशत सदस्यों द्वारा पारित किया गया है. इसके बाद लोकसभा भी उस प्रस्ताव पर सहमत हो. हालांकि, इसके बाद भी इसके लिए 14 दिन का नोटिस देना होता है. अनुच्छेद 67 में लिखा है कि उपराष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है. उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को एक लेटर लिख उस पर दस्तखत कर अपना पद त्याग सकता है. अगर उसके पद की अवधि खत्म भी हो गई है, तो उसके उत्ताधिकारी के पद ग्रहण करने तक वह उस पद पर बना रहेगा.

ऐसा हुआ तो भारत के संसदीय इतिहास में पहला मौका

यदि ऐसा होता है तो यह भारत के संसदीय इतिहास में सभापति को हटाने का पहला प्रयास होगा और इसे अध्यक्ष के लिए शर्मिंदगी के रूप में देखा जाएगा. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, विपक्षी सूत्रों ने कहा कि अगस्त में मॉनसून सत्र के दौरान जब इस कदम की योजना बनाई गई थी, तब उनके पास सभी इडिया ब्लॉक दलों के ‘आवश्यक संख्या में हस्ताक्षर’ थे, लेकिन उन्होंने आगे नहीं बढ़ने दिया क्योंकि उन्होंने जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) को ‘एक और मौका’ देने का फैसला किया था. हालांकि, अब विपक्ष ने आगे बढ़ने के लिए राजी कर लिया है.

उपराष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया या सिर्फ मैसेज देने की कवायद

first time in history संख्या जुटाने के अलावा, विपक्ष को अध्यक्ष को हटाने के लिए 14 दिन के नोटिस से भी गुजरना होगा. सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर अगुवाई की थी और टीएमसी-एसपी के अलावा अन्य भारतीय ब्लॉक दलों ने इसका समर्थन किया था. टीएमसी के एक सूत्र ने कहा, ‘यह कुर्सी के बारे में नहीं है, यह भाजपा के बारे में है.’

सूत्रों ने कहा कि अगस्त में विपक्षी दल इस बात से चिंतित थे कि विपक्ष के नेता का माइक्रोफोन कथित तौर पर बार-बार बंद किया जा रहा था. एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘विपक्ष चाहता है कि सदन नियमों और परंपराओं के अनुसार चले और सदस्यों के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी अस्वीकार्य है.’ कांग्रेस के जयराम रमेश ने कहा, ‘विपक्ष चाहता है कि संसद चले. पिछले दो-तीन दिनों में यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार नहीं चाहती कि सदन चले. आज मैंने राज्यसभा में जो देखा वह अविश्वसनीय था. विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति नहीं दी गई और सदन के नेता को बोलने के कई मौके दिए गए.’

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इंडिया गठबंधन को लेकर लालू यादव का बड़ा बयान, ममता को दे दिया जाए नेतृत्व, कांग्रेस के कहने से कुछ नहीं होगा

पटना। RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इंडिया गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी को सौंपने के सवाल पर बड़ा बयान दिया है. दरअसल इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस को एक तरह से दरकिनार करते हुए ममता बनर्जी को तरजीह दी है. दरअसल लालू प्रसाद यादव ने इंडिया गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी को देने के की बात पर कांग्रेस की आपत्ति को लेकर कहा कि कांग्रेस के आपत्ति जताने से कुछ नहीं होगा. ममता बनर्जी को नेतृत्व दिया जाए. वहीं इससे पहले तेजस्वी यादव ने भी ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन की काम सौंपने की बात का समर्थन किया था.

वहीं लालू यादव (Lalu Yadav) ने नीतीश कुमार की प्रस्तावित महिला संवाद यात्रा पर भी निशाना साधा है. लालू प्रसाद यादव से जब नीतीश कुमार की महिला संवाद यात्रा को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह आंख सेकने जा रहे हैं. जाने दीजिए. वह यात्रा नहीं करेंगे सिर्फ आंख सेकने जा रहे हैं. पहले आंख सेकें अपना फिर सरकार बनाने के लिए सोचें. वहीं विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के 200 प्लस सीट जीतने के दावे पर भी लालू यादव ने कहा कि वह पहले आंख सेकें अपना फिर सरकार बनाने के लिए सोचें.

जानें क्या है पूरा मामला

बता दें, बीते दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते दिनों एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू इंडिया गठबंधन को लीड करने का दावा किया था. ममता बनर्जी ने महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव के परिणाम पर चर्चा करते हुए कहा था कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वह इंडिया गठबंधन को लीड करते हुए बेहतर करने का काम करेंगी. उनके इसी बयान के बाद से देशभर की सियासत में ममता बनर्जी के नाम पर सियासत तेज हो गयी है.

कांग्रेस ने कहा- ममता का कद अभी इतना बड़ा नहीं

हालांकि कांग्रेस ममता बनर्जी के नेतृत्व को सीधे तौर पर नकार रही है. बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि ममता बनर्जी इंडिया गठबंधन की एक लीडर हैं. ममता बनर्जी की पार्टी सिर्फ बंगाल तक सीमित है. ममता बनर्जी का राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करने का अभी कद नहीं है और ना उनकी पार्टी का. वहीं पप्पू यादव ने भी कहा कि हम सब उनका सम्मान करते हैं. ममता बनर्जी बड़ी नेत्री हैं. खुद राहुल गांधी भी उनका सम्मान करते हैं. लेकिन, ममता जी को दिल बड़ा रखना होगा.

उमर अब्दुल्ला ने कही यह बात

वहीं ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक की कमान सौंपने के सवाल पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद इंडिया गठबंधन की कोई बैठक नहीं हुई है. इसलिए नेतृत्व परिवर्तन का सवाल ही नहीं उठता. बैठक होने दीजिए. ममता बनर्जी चाहें तो नेतृत्व का दावा कर सकती हैं. हालांकि फैसला बैठक के बाद लिया जाएगा.

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छत्तीसगढ़, आश्रम के भोजन में मिली थी छिपकली, 1 छात्रा की मौत, 35 गंभीर, 9 ICU में

बीजापुर। छत्तीसगढ़ बीजापुर के माता रुक्मिणी धनोरा में बालिका आश्रम (Girls Ashram) बड़ी लापरवाही सामने आई है. यहां बच्चों को परोसे जाने वाले खाने में छिपकली मिली थी, जिसके बाद 35 से अधिक बच्चे बीमार हो गए थे. इन्हीं में से एक छात्रा की अब मौत हो गई. वहीं अब भी 35 बच्चे बीमार है, जिसमें से 9 बच्चे आईसीयू में भर्ती बताएं जा रहे है. (बालिका आश्रम के खाने में मिली थी छिपकली, 1 छात्रा की हुई मौत)

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मृतक छात्रा शिवानी तेलम को देर रात मेडिकल कॉलेज जगदलपुर (Jagdalpur) रेफर किया गया था. बच्ची ने भैरमगढ़ में दम तोड़ा. वे मूलतः बीजापुर ब्लॉक के तूमनार की रहने वाली थी. वहीं बाकी बच्चे बीजापुर जिला अस्पताल के ICU में हैं एडमिट बताएं जा रहे है. (बालिका आश्रम के खाने में मिली थी छिपकली, 1 छात्रा की हुई मौत)

परिजनों ने आश्रम अधीक्षिका पर लगाए आरोप

परिजनों ने आरोप लगाए कि अधिक्षिका की लापरवाही से बच्चे की हुई मौत. परिजनों का ये भी आरोप है कि मेनू के अनुसार भोजन नहीं परोसा जा रहा था. भोजन में एक्सपायरी डेट के पनीर, दूध के इस्तेमाल करने का भी आरोप परिजनों ने लगाया है. परिजनों ने ऐसे कर्मचारी, अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की है.

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छत्तीसगढ़ के इतिहास का नया पन्ना शहीद वीर नारायण सिंह के परिवार का अनसुना बलिदान

रायपुर| छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा नायक। शहीद वीर नारायण सिंह। यादगार वीरता और बलिदान का प्रतिरूप। देश के स्वतंत्रता संग्राम में इस आदिवासी परिवार से अकेले वीर नारायण सिंह ही नहीं उनके परिवार के अन्य सदस्यों के बलिदान की कहानी भी सामने आई है। छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ा है सीनियर भाजपा नेताआ और महासमुंद के पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू ने। उनके शोध और ओडिशा-झारखंड यात्रा के दौरान जुटाई गई जानकारी ने स्वतंत्रता आंदोलन के एक भूले हुए अध्याय को उजागर किया है।

शहीद वीर नारायण सिंह के परिवार के छह सदस्यों ने भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की थी। उनके ससुर माधो सिंह को संबलपुर जेल के पास 31 दिसंबर 1858 को फांसी दी गई। उनके चार साले—हटे सिंह, बैरी सिंह, गोविंद सिंह और कुंजल सिंह—को आजीवन कारावास की सजा दी गई, जिनकी जेल में ही मौत हो गई। वहीं उनके एक अन्य साले ऐसी सिंह को सुरंग में जिंदा जलाकर मार दिया गया। यह जानकारी रांची और ओडिशा के बरगढ़ जिले के रिकॉर्ड और पुरानी किताबों में मिली है। चुन्नीलाल साहू ने ओडिशा के प्रोफेसर्स द्वारा लिखी किताबों और ऐतिहासिक दस्तावेजों की जांच कर इस तथ्य को उजागर किया। उनका कहना है कि यह इतिहास छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होना चाहिए ताकि बच्चों को अपने नायकों के संघर्ष और बलिदान के बारे में पता चले।

शहीद वीर

यह खुलासा न केवल छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को और समृद्ध करता है, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को एक नई पहचान भी देता है। यह कहानी उन अनगिनत गुमनाम योद्धाओं को सलाम है, जिनके बलिदान के बिना आजादी अधूरी होती।

कालापानी : अनछुआ इतिहास

शहीद वीर नारायण सिंह के साले हटे सिंह को अंग्रेजों ने रायपुर के पास पकड़ा और उन्हें कालापानी की सजा सुनाई। वह छत्तीसगढ़ से कालापानी की सजा में जाने वाले पहले व्यक्ति थे। जिन्होंने अंडमान की जेल में दम तोड़ा। यह बलिदान छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम का एक अनमोल और अनजाना हिस्सा है।

ओडिशा से जुड़ा इतिहास

चुन्नीलाल साहू ने बताया कि आजादी से पहले महासमुंद का कुछ हिस्सा ओडिशा से जुड़ा था। वीर नारायण सिंह और उनका परिवार इन इलाकों में सक्रिय थे। 1857 की क्रांति के बाद उनके परिवार ने भी अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए। अंग्रेजों ने इस परिवार की जानकारी को जानबूझकर ओडिशा के रिकॉर्ड में छिपा दिया, जिससे छत्तीसगढ़ में उनके योगदान को भुला दिया गया।

स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग

साहू ने कहा है कि इन तथ्यों को राज्य के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए वह मुख्यमंत्री से मिलेंगे। यह पहल शहीद वीर नारायण सिंह के परिवार के अनसुने बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

बलिदान दिवस पर पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ नीरज गजेंद्र का लिखा- छत्तीसगढ़ के वीरनारायण सिंह केवल अतीत का एक नाम नहीं हैं। वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श और विचार हर दौर में महत्वपूर्ण रहेंगे। 10 दिसंबर का बलिदान दिवस केवल उन्हें याद करने का दिन नहीं है। यह उनके आदर्शों को अपनाने और उनके बलिदान को सार्थक बनाने का अवसर है।

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बलिदान दिवस पर पढ़िए वरिष्ठ पत्रकार और लेखक डॉ नीरज गजेंद्र का लिखा- छत्तीसगढ़ के वीरनारायण सिंह केवल अतीत का एक नाम नहीं हैं। वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श और विचार हर दौर में महत्वपूर्ण रहेंगे। 10 दिसंबर का बलिदान दिवस केवल उन्हें याद करने का दिन नहीं है। यह उनके आदर्शों को अपनाने और उनके बलिदान को सार्थक बनाने का अवसर है।

वीरनारायण सिंह। यह नाम छत्तीसगढ़ की मिट्टी में साहस, बलिदान और मानवता की खुशबू की तरह बसा है। उनका जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। यह शोषण और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की गाथा है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका ने यह साबित किया कि छत्तीसगढ़ की धरती भी आजादी की लड़ाई का एक मजबूत केंद्र रही। उनके संघर्ष और बलिदान की कहानी आज भी हमें सिखाती है कि नेतृत्व का असली मतलब क्या होता है। 1856 का समय था। अंग्रेजी हुकूमत अपने चरम पर थी। किसानों से उनका अनाज छीना जा रहा था। भूख और गरीबी ने लोगों को कमजोर बना दिया था।

सोनाखान के जमींदार वीरनारायण सिंह ने इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने अपने गोदाम का अनाज जरूरतमंदों में बांट दिया। यह कदम अंग्रेजों को नागवार गुजरा। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन वीरनारायण सिंह का साहस कम नहीं हुआ। जेल से निकलने के बाद वे सीधे जनता के बीच पहुंचे। उन्होंने विद्रोह का बिगुल बजाया। अंग्रेजों के खिलाफ लोगों को संगठित किया। इस विद्रोह ने छत्तीसगढ़ में आजादी की भावना को और मजबूत किया। उनके साहस ने यह दिखा दिया कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना ही असली नेतृत्व है। 10 दिसंबर 1857 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। रायपुर के जयस्तंभ चौक पर वीरनारायण सिंह को फांसी दी गई। लेकिन उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी। उनके संघर्ष ने आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया।

आज जब हम उनके बलिदान को याद करते हैं। यह सोचने पर मजबूर होते हैं। क्या हमारे नेता और नेतृत्वकर्ता उनसे कुछ सीख सकते हैं। वीरनारायण सिंह जमींदार थे। उन्होंने अपनी संपत्ति का उपयोग गरीबों के लिए किया। अधिकार आमजन के हित में होता था। उन्होंने कभी इसे निजी लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया। उनके लिए जमींदारी का मतलब था—शोषितों की रक्षा करना। आज राजनीति और सत्ता को अक्सर व्यक्तिगत लाभ का माध्यम माना जाता है। नेता जनता की जरूरतों को भूल जाते हैं। राजनीति में नैतिकता का अभाव दिखता है। कई बार सत्ता में बैठे लोग जनता की जरूरतों को भूल जाते हैं। ऐसे में वीरनारायण सिंह का जीवन एक आदर्श है। उन्होंने सिखाया कि नेतृत्व केवल शासन करने का नाम नहीं है। यह लोगों की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा का माध्यम है। उनका जीवन हर व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा है।

उन्होंने दिखाया कि न्याय और सच्चाई के लिए संघर्ष करना ही असली बलिदान है। आज जब सामाजिक असमानता और अन्याय बढ़ रहे हैं, तो उनका आदर्श और प्रासंगिक हो जाता है। वीरनारायण सिंह ने हमें यह भी सिखाया कि सत्ता का सही उपयोग समाज को सशक्त बनाता है। यदि आज के नेता और अधिकारी उनसे प्रेरणा लें, तो समाज में बड़ा बदलाव आ सकता है। उनकी ईमानदारी, जनता के प्रति निष्ठा और साहस वर्तमान पीढ़ी के लिए सबक है।

छत्तीसगढ़ के वीरनारायण सिंह केवल अतीत का एक नाम नहीं हैं। वे आज भी प्रासंगिक हैं। उनके आदर्श और विचार हर दौर में महत्वपूर्ण रहेंगे। 10 दिसंबर का बलिदान दिवस केवल उन्हें याद करने का दिन नहीं है। यह उनके आदर्शों को अपनाने और उनके बलिदान को सार्थक बनाने का अवसर है। उनके बलिदान को सार्थक बनाने का अवसर है। वीरनारायण सिंह केवल अतीत का एक नाम नहीं हैं। वे हमारे आज और कल के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन हर युग में प्रासंगिक रहेगा।

ज़िंदगीनामा
पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र

neegaj@gmail.com

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Ank Jyotish मंगलवार 10 दिसबंर: जानें आज का शुभ रंग और कलर

ज्योतिष डेस्क, वेबमोर्चा डॉट कॉम: Ank Jyotish मंगलवार 10 दिसबंर: अंकों के माध्यम से मनुष्य के विषय एवं उसके भविष्य को जानने का प्रयास किया जाता है। उदाहरण के लिए समझिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म 23 अप्रैल को हुआ है तो उसकी जन्म तारीख के अंकों का योग 2+3=5 आता है। अर्थात 5 उस व्यक्ति का मूलांक कहा जाएगा। अगर किसी की जन्मतिथि दो अंकों यानी 11 है तो उसका मूलांक 1+1= 2 होगा। मिलेगी मदद! जानें आज अपना भविष्यफल…

Aaj Ka Ank Jyotish आज अंक ज्योतिष Ank shaastr
Ank Jyotish अंक शास्त्र

अंक 1

आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है। Ank Jyotish आप लोगों को अपने रचनात्मक स्वभाव से प्रभावित करेंगे। आपको पढ़ाई के अच्छे नतीजे मिलेंगे। निवेश से भी मनचाहा लाभ हासिल होगा।

शुभ अंक- 75

शुभ रंग- गुलाबी

अंक 2

आज आपके ऊपर काम अधिक रहने के कारण मानसिक तनाव बना रहेगा। Ank Jyotish समझदारी आपको एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करने में मदद करेगी। किसी काम को आप दूसरों के भरोसे ना छोड़ें। वैवाहिक जीवनसुखमय रहेगा।

शुभ अंक- 19

शुभ रंग- बैंगनी

अंक 3

आज काम को लेकर किसी यात्रा पर जाएंगे, जो लाभदायक रहेगी। Ank Jyotish कार्यक्षेत्र में आपको माहौल को हल्का बनाने का प्रयास करना होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। आपकी किसी नए काम के प्रति रुचि जागृत हो सकती है।

शुभ अंक -27

शुभ रंग- लाल

अंक 4

आज का दिन आपको भौतिक सुखों में वृद्धि लेकर आने वाला है। Ank Jyotish किसी नए वाहन की खरीदारी करना आपके लिए अच्छा रहेगा। निवेश से मनचाहा लाभ हासिल होगा। परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हो सकता है।

शुभ अंक- 54

शुभ रंग- नीला

अंक 5

आज का संगीत और फोटोग्राफी के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अच्छा रहेगा। Ank Jyotish आर्थिक रूप से थोड़ा तनाव हो सकता है। आपको जीवनसाथी की ओर से कोई खुशखबरी सुनने को मिलेगी। संतान आपकी उम्मीदों पर खरी उतरेगी।

शुभ अंक- 10

शुभ रंग-ग्रे

अंक 6

निवेश के लिए समय शुभ रहेगा। Ank Jyotish नौकरी की तालाश कर रहे लोगों को शुभ समाचार की प्राप्ति होगी। प्रेम जीवन जी रहे लोगों का जीवन सुखसमय होगा। बिजनेस को लेकर योजनाएं बनाएंगे, जो आपको लाभ देगी।

शुभ अंक- 22

शुभ रंग-  हल्का नीला

अंक 7

जीवनसाथी के साथ किसी कार्य की शुरुआत कर सकते हैं। Ank Jyotish निवेश में मनचाहा लाभ न मिल पाने के कारण मन परेशान होगा। व्यापार में नुकसान की संभावनाएं भी बन रही हैं। कार्यक्षेत्र में आनंद आएगा।

शुभ अंक- 18

शुभ रंग- सुनहरा

अंक – 8

आज आप धार्मिक कार्यों एवं गतिविधियों के साथ आप खुश व संतुष्ट रहेंगे। Ank Jyotish आज परिवार को शॉपिंग करा सकते हैं। किसी खास व्यक्ति से मुलाकात होगी, जिससे मन प्रसन्न होगा।

शुभ अंक – 2

शुभ रंग–मैरून

अंक ज्योतिष अंक शास्त्र Ank shaastr आज
अंक शास्त्र

अंक 9

आज ब्लड प्रेशर हाई हो सकता है। Ank Jyotish परिवार के सदस्यों से सामंजस्य बनाकर रहें। संतान तेजस्वी होगी और अपने काम के प्रति समर्पित रहेगी। इस दौरान किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है।

शुभ अंक – 01

शुभ रंग – लाल

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Aaj Ka Panchang, 10 December 2024 : जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

Today Panchang | Margashirsha Month 2024, dashmi tithi : आज मंगलवार मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। साथ ही आज दशमी तिथि अर्धरात्रोत्तर 03 बजकर 43 मिनट तक उपरांत एकादशी तिथि का आरंभ होगा। आइए जानते हैं आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय कब से कब तक रहेगा।

राष्ट्रीय मिति मार्गशीर्ष 19, शक संवत 1946, मार्गशीर्ष, शुक्ल, दशमी, मंगलवार, विक्रम संवत् 2081। सौर मार्गशीर्ष मास प्रविष्टे 25, जमादि उल्सानी-07, हिजरी 1446 (मुस्लिम) तदनुसार अंग्रेजी तारीख 10 दिसम्बर सन् 2024 ई.। सूर्य दक्षिणायन, दक्षिण गोल, हेमन्त ऋतु। राहुकाल अपराह्न 03 बजे से 04 बजकर 30 मिनट तक।

Aaj Ka Panchang दशमी तिथि अर्धरात्रोत्तर 03 बजकर 43 मिनट तक उपरांत एकादशी तिथि का आरंभ। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र अपराह्न 01 बजकर 30 मिनट तक उपरांत रेवती नक्षत्र का आरंभ। व्यतिपात योग रात्रि 10 बजकर 03 मिनट तक उपरांत वरीयान योग का आरंभ। तैतिल करण सायं 04 बजकर 53 मिनट तक उपरांत वणिज करण का आरंभ। चंद्रमा दिन रात मीन राशि पर संचार करेगा।

सूर्योदय का समय 10 दिसंबर 2024 : सुबह में 7 बजकर 3 मिनट पर।

सूर्यास्त का समय 10 दिसंबर 2024 : शाम में 5 बजकर 24 मिनट पर।

आज का शुभ मुहूर्त 10 दिसंबर 2024 : Aaj Ka Panchang

ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 17 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। निशिथ काल मध्‍यरात्रि रात में 11 बजकर 53 मिनट से से 12 बजकर 47 मिनट तक। गोधूलि बेला शाम 5 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक। अमृत काल सुबह 10 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 14 मिनट तक।

आज का अशुभ मुहूर्त 10 दिसंबर 2024 : Aaj Ka Panchang

राहुकाल दोपहर में 3 बजे से 4 बजकर 30 मिनट तक। वहीं, दोपहर में 12 बजे से 1 बजकर 30 मिनट तक गुलिक काल रहेगा। सुबह में 9 बजे से 10 बजकर 30 मिनट तक यमगंड रहेगा। दुर्मुहूर्त काल सुबह में 9 बजकर 11 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक। पंचक काल पूरा समय रहने वाला है।

आज का उपाय : आज हनुमान चालीसा का पाठ करें।

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एक देश एक चुनाव: इसी सत्र में विधेयक पेश कर सकती है मोदी सरकार, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा

केंद्र की मोदी सरकार एक देश एक चुनाव (one country one election) को लेकर तैयारियों में जुटी है और मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसी संसद सत्र में एक देश-एक चुनाव विधेयक पेश किया जा सकता है। विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की बात भी कही जा रही है। गौरतलब है कि एक देश, एक चुनाव पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट को कैबिनेट से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।

One country-one election: Modi can introduce bill in this session
One country-one election: Modi can introduce bill in this session

एक देश एक चुनाव पर मोदी कैबिनेट की मंजूरी!

विधेयक पास कराने में केंद्र को करनी होगी कड़ी मशक्कत

एक देश एक चुनाव प्रस्ताव का उद्देश्य देश में एक साथ चुनाव कराना है, जिससे संसाधन, समय और लागत की बचत होगी। अभी राज्यों में अलग-अलग और लोकसभा चुनाव अलग होते हैं। यह एक बड़ी पहल है, जिसे लेकर केंद्र सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि केंद्र की इस पहल को विपक्ष के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिससे साफ है कि केंद्र सरकार को इस विधेयक पर आम सहमति बनाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि राजनीतिक पार्टियों में सहमति बनाने के लिए केंद्र सरकार इस विधेयक को संसद में पेश करने के बाद संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज सकती है।

संविधान में संशोधन भी करना होगा

एक देश एक चुनाव को हकीकत में बदलने के लिए सरकार को संविधान में भी संशोधन करना होगा, जिसके लिए छह विधेयक दोनों सदनों के दो तिहाई बहुमत से पास होने जरूरी हैं। भाजपा नीत एनडीए का लोकसभा और राज्यसभा में बहुमत है, लेकिन संविधान संशोधन आसान नहीं होगा। विपक्ष एक देश एक चुनाव को व्यवहारिक नहीं मान रहा, साथ ही इसे अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक भी बता रहा है। विपक्ष का तर्क है कि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने में रसद और संचालन संबंधी काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और इससे प्रशासन प्रभावित हो सकता है और संघीय सिद्धांत भी कमजोर हो सकते हैं।

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छत्तीसगढ़ बालोद में बोलेरो और बाइक की टक्कर में 2 की मौत, 5 घायल

बालोद। जिले में नेशनल हाईवे मार्ग 30 के मरकाटोला CRPF कैंप के पास सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ. राजा राव पठार मेला देखकर घर लौट रहे दो युवकों की बाइक बोलेरो वाहन से टकरा गई. इस हादसे में बाइक सवार दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बोलेरो में सवार 5 लोग घायल हैं. यह मामला पुरूर थाना क्षेत्र का है.

जानकारी के अनुसार, राजा राव पठार में तीन दिवसीय मेला लगा हुआ है। वहीं आज बाइक सवार दो युवक मेला देखने गए थे और शाम को मेला देखकर घर लौट रहे थे. इसी दौरान बाइक और बोलेरो वाहन में आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई. टक्कर उतना भीषण था की बाइक के परखच्चे उड़ गए. वहीं हादसे में दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. साथ ही बोलेरो में सवार 5 लोग घायल हो गए हैं. हादसे के बाद सभी घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से चारामा स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां सभी का इलाज जारी है.

हादसे में मृत युवकों की पहचान देवराज कोड़ोपी (23 वर्ष) पिता छेदीलाल निवासी ग्राम धनोरा, दुधावा और टिकेश्वर मंडावी (24 वर्ष) पिता खिलेश मंडावी के रूप में हुई है.

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जिंदगीनामा : सर्दी, सेहत के साथ खेल में कैरियर तराशने का मौसम

डॉ. नीरज गजेंद्र, वरिष्ठ पत्रकार

सर्दी का मौसम सबके लिए खास होता है। ठंडी हवा, कोहरे की चादर और धूप की नरम थपकियां, इसे और खूबसूरत बनाती हैं। रात को अलाव की गरमी। दिन में धूप सेंकने का आनंद। सेहत सुधारने का यह मौसम अनोखा होता है। यह नई ऊर्जा के साथ जीवन को गति देने का समय है। यह खेल के मैदान में मेहनत कर ताकत और हुनर को तराशने का मौसम है। आज खेल-कूद केवल मनोरंजन का नहीं, जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पहले कहा जाता था, पढ़ोगे-लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे-कूदोगे तो होवोगे खराब। अब यह कहावत बदल गई है। खेल से लाखों युवा अपना करियर बना रहे हैं। साथ ही, देश का नाम भी रोशन कर रहे हैं। यह सब सच्ची लगन और समर्पण से संभव है।

महाभारत काल के एकलव्य की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची लगन और समर्पण क्या होता है। बिना गुरु के उन्होंने दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर बनने की ठानी। उनकी एकाग्रता ऐसी थी कि उन्होंने कुत्ते के मुंह को तीरों से भर दिया, और कुत्ते को खरोंच तक नहीं आई। यह केवल ध्यान, अभ्यास और लक्ष्य पर केंद्रित रहने से संभव हुआ।

भारतीय खेल इतिहास में ऐसे कई नाम हैं, जिन्होंने यह साबित किया है कि खेल के माध्यम से भी न केवल सफलता पाई जा सकती है, बल्कि दुनिया में अपनी पहचान बनाई जा सकती है। मिल्खा सिंह, जो कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास की मिसाल है। उनके जीवन का सफर यह दिखाता है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, अगर आत्मबल और मेहनत हो, तो सफलता दूर नहीं। मैरी कॉम, जो मणिपुर के एक छोटे से गांव से निकलीं, आज दुनिया की महानतम मुक्केबाजों में से एक हैं। नीरज चोपड़ा ने भाला फेंक में अपनी कला को ऐसा तराशा कि भारत के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाया। उनके खेल का स्तर यह दिखाता है कि सही दिशा में मेहनत और लक्ष्य साधने से असंभव कुछ भी नहीं।

खेल अनुशासन सिखाता है। यह धैर्य, समय प्रबंधन और टीम वर्क के गुण विकसित करता है। एक खिलाड़ी जानता है कि हर सेकंड कीमती है। यही गुण जीवन के अन्य पहलुओं में भी मददगार होते हैं। आज सर्दी के इस मौसम में स्कूल और कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताएं हो रही हैं। पढ़ाई के साथ खेल-कूद को अपनाना जरूरी है। सरकार भी खेलों को बढ़ावा दे रही है। खेलो इंडिया और फिट इंडिया जैसे अभियान इसकी मिसाल हैं। तो, इस सर्दी, ठंडी हवा और धूप के बीच अपने लक्ष्य तय करें। चाहे वह पढ़ाई हो या खेल, सच्ची लगन और मेहनत से सफलता निश्चित है। एकलव्य की कहानी से प्रेरणा लें। अपने भीतर छुपे खिलाड़ी को पहचानें।