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Siyaram Baba: संत सियाराम बाबा का 110 साल में निधन, बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था

Siyaram Baba: देश और निमाड़ के प्रसिद्ध संत सियाराम बाबा ने आज तड़के सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर अंतिम सांस ली। बाबा के निधन से मतलब एक धर्म और आस्था के केंद्र का एक युग समाप्त हो गया है। बाबा के निधन से देश में शोक की लहर छा गई। शाम 4 बजे आश्रम के सामने मन्दिर के पास बाबा का अंतिम संस्कार किया गया, उनके अंतिम दर्शन के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी पहुंचे और बाबा श्रंद्धाजलि दी।

वही बाबा के अंतिम दर्शन करने के लिए निमाड़ के लाखों श्रदालुओ की भीड़ उमड़ पड़ी, और हर कोई बाबा के अंतिम दर्शन करने के लिए 5 किलो मीटर पैदल चलकर उनके आश्रम पहुच रहे थे। खरगोन जिले के रेवा खण्ड में स्थित ग्राम तेली भट्टयान में नर्मदा किनारे संत श्री सियाराम बाबा का आश्रम है। श्री सियाराम बाबा कुछ दिनों से निमोनिया होने से अस्वस्थ्य चल रहे थे ओर उनका उपचार चिकित्सको द्वारा किया जा रहा है।

वही सियाराम बाबा Siyaram Baba के निधन को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बाबा को पूरे देश में सियाराम बाबा के नाम से जानते थे और बाबा के निधन से बहुत दुखी हूं बाबा केवल 10 रूपये ही लेते थे। बाबा के चरणों मे पूरी सरकार की ओर विन्रम श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।

शाम को नर्मदा किनारे होगी अंत्येष्टी

सियाराम बाबा Siyaram Baba की अंत्येष्टी बुधवार शाम को आश्रम के समीप नर्मदा नदी किनारे की जाएगी। उनके निधन की खबर के बाद बड़ी संख्या में भक्तों के आश्रम पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। सीएम मोहन यादव की बाबा के अंतिम दर्शन के लिए  आएंगे। बता दें कि बाबा को निमोनिया हो गया था, लेकिन वे अस्पताल में रहने के बजाए आश्रम में रहकर अपने भक्तों से मिलना चाहते थे। इस कारण चिकित्सकों ने उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया था।

12 वर्षों तक मौन धारण किया

संत सियाराम बाबा Siyaram Baba ने नर्मदा किनारे अपने आश्रम बनाया। उनकी उम्र 110 साल से ज्यादा थी। बाबा ने बारह वर्षों तक मौन भी धारण कर रखा था। जो भक्त आश्रम में उनसे मिलने आता है और ज्यादा दान देना चाहता थे तो वे इनकार कर देते थे। वे सिर्फ दस रुपये का नोट ही लेते थे। उस धनराशि का उपयोग भी वे आश्रम से जुड़े कामों में लगा देते थे। बाबा ने नर्मदा नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे तपस्या की थी और बारह वर्षों तक मौन रहकर अपनी साधना पूरी की थी। मौन व्रत तोड़ने के बाद उन्होंने पहला शब्द सियाराम बाबा कहा तो भक्त उन्हें उसी नाम से पुकारने लगे। हर माह हजारों भक्त उनके आश्रम में आते है।

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