एक तरफ होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दुनिया में तनाव और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर अब समुद्र से आई एक नई चेतावनी ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में तेजी से बढ़ती गर्मी इस बात का संकेत दे रही है कि आने वाले महीनों में अल-नीनो बेहद मजबूत रूप ले सकता है। इसका असर भारत में मानसून, खेती और आम जनजीवन पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
महासागरों का बढ़ता तापमान बना खतरे की घंटी
हालिया वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल महीने में दुनिया के महासागरों का औसत सतही तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इतिहास के दूसरे सबसे ऊंचे स्तर पर माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्री पानी सामान्य से कहीं ज्यादा गर्म हो चुका है। यही स्थिति अल-नीनो के मजबूत होने का संकेत देती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मई से जुलाई के बीच अल-नीनो पूरी तरह सक्रिय हो सकता है और इसका प्रभाव जून से सितंबर तक रहने वाले मानसून पर सीधे तौर पर दिखाई देगा। अगर यह स्थिति और गंभीर हुई तो भारत में सामान्य से काफी कम बारिश हो सकती है।
कम बारिश और सूखे का बढ़ सकता है खतरा
भारत की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है। ऐसे में कमजोर मानसून का असर सीधे कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। अनुमान है कि इस बार बारिश औसत से 10 से 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी खरीफ फसलों पर पड़ सकता है।
कम बारिश के कारण जलसंकट बढ़ेगा और सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। छोटे और सीमांत किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ज्यादा बिगड़े तो कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है।
भीषण गर्मी और हीटवेव का खतरा
अल-नीनो के प्रभाव से उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इससे हीटवेव की घटनाएं बढ़ेंगी और बच्चों तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। लगातार दिन-रात गर्मी रहने से लोगों को राहत मिलना मुश्किल हो सकता है।
चक्रवाती तूफानों की भी आशंका
विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में समुद्री तापमान बढ़ने से चक्रवाती तूफानों की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि अल-नीनो कुछ मामलों में तूफानों की तीव्रता को प्रभावित करता है, लेकिन समुद्री अस्थिरता बढ़ने से मौसम की स्थिति और जटिल हो सकती है।
अब क्या करना होगा?
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यह समय सतर्क रहने का है। सरकार और आम लोगों दोनों को जल संरक्षण और ऊर्जा बचत पर विशेष ध्यान देना होगा। किसानों को सूखा-रोधी बीज, वैकल्पिक सिंचाई और फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी जा रही है।
इसके साथ ही मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत करने, फसल बीमा योजनाओं को प्रभावी बनाने और पानी के बेहतर प्रबंधन पर जोर देने की जरूरत बताई जा रही है। आने वाले महीनों में मौसम की हर हलचल पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।



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