ब्रेकिंग न्यूज: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा में बदलाव, सांसदों की संख्या बढ़कर 850 होगी
नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ रहा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के कार्यान्वयन के साथ ही लोकसभा की संरचना में बड़े बदलाव होने की संभावना है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अधिनियम के लागू होने के बाद लोकसभा में सांसदों की कुल संख्या 850 तक पहुँच जाएगी। जबकि पहले यह संख्या 816 रहने की उम्मीद थी, नए संशोधन बिल के ड्राफ्ट में 850 सीटों का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि यह बिल 2034 के बजाय 2029 के आम चुनावों से पहले ही लागू कर दिया जाए।
लोकसभा में सीटों का नया गणित
महिला आरक्षण विधेयक के नए ड्राफ्ट पर यदि मुहर लगती है, तो संसद में सीटों का अलॉटमेंट पूरी तरह से पुनर्गठित हो जाएगा। नए प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा में कुल 850 सीटें होंगी। इसमें से 815 सीटें राज्यों के लिए निर्धारित की जाएंगी, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) से 35 सांसद चुनकर आएंगे, जिसमें अकेले दिल्ली के पास 11 सीटें होंगी। इस बीच, महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के अंतर्गत कम से कम 273 सीटें सुरक्षित की जाएंगी। इसके अलावा, अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 136 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 होने का अनुमान है।
2034 के बजाय 2029 में लागू होने की तैयारी
इस विधेयक को 2023 में मंजूरी मिली थी, लेकिन इसे 2034 चुनावों से लागू करने का पहले से ही योजना बनाई गई थी। अब सरकार का मन है कि इसे जल्द लागू किया जाए। संसद का तीन दिनों का ‘विशेष सत्र’ प्रारंभ होने जा रहा है, जिसमें इस संशोधन बिल को पेश किया जाएगा। सीटों के पुनः परिसीमन की प्रक्रिया 2011 की जनगणना के आधार पर की जाएगी, जो लगभग दो साल का समय लेगी।
पीएम मोदी का सक्रिय प्रयास और विपक्ष का विरोध
इस विधेयक को त्वरित गति से पारित कराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने हाल ही में भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया और अंबेडकर जयंती पर देश की महिलाओं के नाम एक खुला पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने महिलाओं से अपील की है कि वे अपने सांसदों को लिखें और महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने का दबाव डालें।
हालांकि, विपक्ष ने सरकार की इस तेजी पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया राजनीतिक लाभ के लिए जल्दी हुई है। दक्षिणी राज्यों के नेताओं को बिना किसी ठोस गारंटी के परिसीमन को लेकर चिंताएं हैं कि उनकी लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं।
निष्कर्ष
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के महत्व को देखते हुए यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक कदम है। आगामी समय में यदि यह विधेयक पारित होता है, तो यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका को मजबूती प्रदान करेगा। सरकार को चाहिए कि वह सभी पक्षों की चिंताओं पर ध्यान दे, ताकि यह प्रक्रिया व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ सके।