देश में इंडस्ट्रीयल आउटपुट में बढ़ोतरी, फरवरी 2026 में 5.2% की वृद्धि
भारत के औद्योगिक क्षेत्र में सकारात्मक विकास की खबर आई है। फरवरी 2026 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 5.2 प्रतिशत बढ़ा है। अब यह जनवरी 2026 की 4.8 प्रतिशत की दर से ऊपर चला गया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी की गई नवीनतम रिपोर्ट से ये आंकड़े सामने आए हैं।
औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि का मुख्य कारण
फरवरी 2026 में IIP का कुल सूचकांक 159 पर पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 151.1 था। इस वृद्धि ने औद्योगिक गतिविधियों की निरंतरता को दर्शाया है। मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र ने सबसे ज्यादा वृद्धि की, जिसमें 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। इसके अलावा, खनन क्षेत्र में 3.1 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 2.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
विभिन्न उद्योगों का प्रदर्शन
विनिर्माण क्षेत्र में 23 उद्योग समूहों में से 14 ने सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। वस्त्र विनिर्माण में मामूली वृद्धि 0.4 प्रतिशत रही, जबकि कपड़ों का उत्पादन 16.6 प्रतिशत की तेजी से गिरावट दिखाई। यह मांग के दवाब को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। चमड़े के उत्पादों में 0.6 प्रतिशत की मामूली वृद्धि हुई है।
पूंजी वस्तुओं का उत्पादन 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। वहीं, बुनियादी ढांचा और निर्माण सामग्रियों में 11.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो निवेश गतिविधियों को दर्शाता है। मध्यवर्ती सामान और उपभोक्ता ड्यूरेबल्स में भी स्वस्थ वृद्धि देखी गई है, क्रमशः 7.7 प्रतिशत और 7.3 प्रतिशत। हालाँकि, उपभोक्ता नॉन-ड्यूरेबल्स में थोड़ी गिरावट 0.6 प्रतिशत देखी गई है।
निवेश की स्थिरता का संकेत
विभिन्न सेक्टरों से मिले संकेतों के अनुसार, निवेश गतिविधियों में स्थिरता देखने को मिल रही है और यह विकास दर को बनाए रखने में मदद कर रही है। मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार की वृद्धि आगे चलकर औद्योगिक उत्पादन को और मजबूती देगी।
कुल मिलाकर, भारत का औद्योगिक उत्पादन फरवरी 2026 में अच्छी रफ्तार पकड़ रहा है, जो विकास के सकारात्मक संकेत प्रदान करता है। यह विकास दर विभिन्न क्षेत्रों में मांग की स्थितियों के अनुरूप जटिलताओं को दर्शाते हुए भी एक संतुलित और स्थिर अर्थव्यवस्था का संकेत देती है।
इस प्रकार के जानकारी से न केवल औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति स्पष्ट होती है बल्कि यह भी लगता है कि आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी।
