ईरान: भारत ने ऊर्जा संकट में बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका को तेल भेजा

ब्रेकिंग न्यूज़: पड़ोसी देशों में भारत की बढ़ती अहमियत
ईरान युद्ध के चलते ऊर्जा संकट ने दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका को एक बार फिर से प्रमुख बना दिया है। बांग्लादेश, मालदीव और श्रीलंका जैसे देशों ने भारत से तत्काल ईंधन की आपूर्ति की मदद मांगी है।

भारत का ‘पड़ोस पहले’ दृष्टिकोण

कुछ महीने पहले तक, भारत को अपने पड़ोसियों से खतरनाक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। "India Out" जैसे अभियानों ने कई देशों में भारत के प्रति नकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा दिया था। लेकिन अब, जब पड़ोसियों को ऊर्जा की आवश्यकता महसूस हो रही है, भारत ने अपनी पुरानी कड़वाहट को भुलाकर मदद का हाथ बढ़ाया है।

ईरान युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति में कमी आई है, जिसका सबसे बड़ा असर दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिल रहा है। भारत ने पहले ही बांग्लादेश और श्रीलंका को ईंधन की हजारों टन की आपूर्ति की है और मालदीव की मदद पर भी विचार कर रहा है।

बांग्लादेश की मुश्किलें

बांग्लादेश, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 95% तेल और 30% गैस आयात करता है, वर्तमान में गंभीर संकट का सामना कर रहा है। गैस की कमी के कारण वहां व्यापक बिजली कटौती हो रही है, जिससे उसकी टेक्सटाइल और कपड़ा उद्योग पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

बांग्लादेश सरकार ने भारत से सहायता मांगी है। भारत ने तात्कालिक उपाय करते हुए "भारत-बांग्लादेश मित्रता पाइपलाइन" के जरिए उच्च-गति वाले डीजल की आपूर्ति शुरू कर दी। पहले चरण में भारत ने 5,000 टन डीजल भेजा, और अगले हफ्ते 10,000 टन और भेजने की योजना है।

मालदीव का भारत से संबंध

मालदीव में भारत के प्रति नकारात्मकता अब पिछले साल की तरह नहीं रही। हाल ही में, मालदीव सरकार ने भारत से ईंधन की आपूर्ति की मांग की है। 2024 में, भारत के खिलाफ एक अभियान के बाद मालदीव ने जब भारतीय सैनिकों को देश से वापस बुलाने का निर्णय लिया तो संबंधों में खटास आ गई थी।

लेकिन वर्तमान ऊर्जा संकट ने मालदीव को भारत की ओर देखना मजबूरी बना दिया है। भारत ने हाल ही में मालदीव से पेट्रोल और एटीएफ (एविएशन टरबाइन फ्यूल) की मांग पर गौर करना शुरू किया है।

श्रीलंकाई संकट और भारत की भूमिका

श्रीलंका में वर्तमान ऊर्जा संकट ने 2022 की गिरावट की यादें ताजा कर दी हैं। श्रीलंका इस समय अपनी ऊर्जा जरूरतों का 60% आयात करता है। ईरान युद्ध ने एक बार फिर से वहां की अर्थव्यवस्था को हिला दिया है।

श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से बात की और मदद मांगी। भारत ने तात्कालिक सहायता के तहत 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल श्रीलंका भेजा।

सारांश

हाल के घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है कि भारत निश्चित रूप से दक्षिण एशिया की ऊर्जा सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। भौगोलिक स्थिति और संकट के समय में पड़ोसी देशों की मदद के कारण, भारत एक बार फिर से क्षेत्रीय स्थिरता का आधार बनता जा रहा है।

इस सभी घटनाओं से यह संदेश साफ है कि भारतीय पड़ोसियों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में भारत की भूमिका कभी खत्म नहीं होगी।

📲 इस खबर को तुरंत शेयर करें

🚨 ताजा खबर सबसे पहले पाएं!

WhatsApp से भी तेज अपडेट के लिए अभी Telegram जॉइन करें

👉 Join Telegram Channel
WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com