महासमुंद। आज 08 सितंबर 2025 को स्थानीय विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा जी के कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उन्होंने अपने करकमलों से श्री शिवाय क्रिकेट अकादमी की नई जर्सी का अनावरण किया।
कार्यक्रम का संचालन अकादमी के प्रमुख एवंएन.आई.एस. क्रिकेट कोच तृपेश साहू जी ने किया। उन्होंने कहा—
“यह जर्सी केवल खेल परिधान नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की मेहनत, समर्पण और खेल भावना का प्रतीक है।”
विधायक जी का उद्बोधन
माननीय विधायक जी ने खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा—
“खेलों से युवा वर्ग में अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास का विकास होता है। श्री शिवाय क्रिकेट अकादमी इस दिशा में सराहनीय कार्य कर रही है। भविष्य में भी हम हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे।”
Shree Shivay Cricket Academy
कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर उपस्थित रहे—
वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश साहू जी
महामंत्री ग्रामीण मंडल रोहित चंद्राकर जी
आकाश पांडे जी
अभिषेक पांडे जी
संतोष साहू जी (व्याख्याता, डाइट)
किरण कन्नोजे जी (व्याख्याता, डाइट)
राजेश चौधरी जी
अकादमी के मुख्य कोच तृपेश साहू जी
खिलाड़ी, अभिभावक एवं अन्य गणमान्यजन
आभार
कार्यक्रम के समापन पर विधायक जी को स्मृति चिह्न भेंट कर आभार व्यक्त किया गया।
📍 तृपेश साहू एन.आई.एस. क्रिकेट कोच संचालक एवं मुख्य कोच श्री शिवाय क्रिकेट अकादमी, महासमुंद 📞 8959677853
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में ईद के दिन भगवा झंडा लगाने को लेकर उपजे विवाद ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। विवादित मामले में आर्मी जवान कौशल निषाद के समर्थन में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिहा आज सुबह सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ उनके घर पहुंचे और भगवा झंडा फहराया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “जय श्री राम” के नारे लगाए और एक स्वर में गीत गाया – “किसी का नीला, किसी का पीला, किसी का झंडा लाल है… इस भगवे को रोक सके वो कौन माई का लाल है।”
क्या है पूरा मामला
ईद के मौके पर मोहल्ले में हरे झंडों से सजावट की गई थी। इसी बीच आर्मी जवान कौशल निषाद ने अपने घर पर भगवा झंडा लगा दिया। देर रात दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जवान से झंडा हटाने को कहा। जवान के इंकार करने पर कथित तौर पर गाली-गलौज और धक्का-मुक्की हुई। जवान ने पुलिस को अपनी आर्मी सर्विस के बारे में बताया, लेकिन इसके बावजूद पुलिसकर्मियों का रवैया आक्रामक रहा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विवाद गहराता चला गया।
झंडा
हिंदू संगठनों का विरोध
वीडियो वायरल होने के बाद बजरंग दल और अन्य हिंदू संगठनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर एसपी को ज्ञापन सौंपा। संगठनों ने आरोप लगाया कि मचांदुर इलाके में बड़ी संख्या में मुस्लिम परिवार अवैध रूप से बसे हुए हैं, जिनकी जांच की जानी चाहिए। साथ ही घटना में शामिल पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
झंडा
आंदोलन की चेतावनी
मामले को लेकर हिंदू संगठनों और भाजयुमो ने पुलिस प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। वहीं, स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
बड़े बुजुर्ग दरख़्त की तरह होते हैं। उनकी छाया में पीढ़ियां अपना घोंसला बनाती हैं। बढ़ती हैं और फिर आगे की पीढ़ियों को सहारा देती हैं। यही परंपरा घर-घर में दिखाई देती है। लेकिन जब कोई बड़ा इस दुनिया से विदा ले लेता है तो उसका शरीर भले हमारे बीच न रहे, उसकी स्मृति, उसका संस्कार और उसका आशीर्वाद पीढ़ियों तक हमारे साथ चलता रहता है। पितृपक्ष इसी गहरे भाव का नाम है।
हिंदू परंपरा में श्राद्ध पक्ष को पितरों का समय कहा जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं और अपने वंशजों से जुड़ते हैं। ऋग्वेद, मनुस्मृति और महाभारत जैसे ग्रंथों में पितृयज्ञ और श्राद्ध का उल्लेख मिलता है। ‘श्राद्ध’ शब्द का अर्थ है श्रद्धा से किया गया कार्य। इसका सीधा संदेश यह है कि पितरों का स्मरण किसी दिखावे या भय से नहीं, बल्कि गहरी श्रद्धा से होना चाहिए। कहा जाता है कि महर्षि अत्रि और अगस्त्य ने सबसे पहले पितृयज्ञ का स्वरूप समाज को बताया। आगे चलकर इसे परंपरा का रूप मिला। श्राद्ध में जल तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोज जैसी विधियाँ इस भाव से की जाती हैं कि हमारे पितरों को तृप्ति मिले और वे संतुष्ट होकर आशीर्वाद दें।
रामायण में भी श्राद्ध का उल्लेख है। जब भगवान राम, सीता और लक्ष्मण वनवास में थे, उस समय भी उन्होंने पितरों का स्मरण करते हुए श्राद्ध कर्म किया। वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि पितृपक्ष में श्राद्ध न करने से पितर असंतुष्ट होते हैं और घर-परिवार की उन्नति रुक जाती है। इसलिए स्वयं श्रीराम ने वनवास जैसी कठिन परिस्थिति में भी श्राद्ध विधि को निभाया। यह प्रसंग हमें बताता है कि परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, पितरों का स्मरण और सम्मान जीवन का अनिवार्य हिस्सा है।
आज जब हम पितृपक्ष मनाते हैं, तो यह केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं होता। यह एक अवसर होता है अपनी जड़ों से जुड़ने का। जैसे कोई दरख़्त अपनी जड़ों से शक्ति लेकर हरियाली बनाए रखता है, वैसे ही हम अपने पूर्वजों की स्मृतियों और आशीर्वाद से जीवन की ऊर्जा पाते हैं।
पितृपक्ष का हर दिन पितरों से संवाद का अवसर है। यह संवाद शब्दों से नहीं, बल्कि श्रद्धा से होता है। जब कोई पुत्र या परिवारजन तर्पण करते हैं, तो यह जल की बूंदें केवल गंगा, यमुना या किसी तालाब को नहीं छूतीं, बल्कि पीढ़ियों की आत्माओं को भी छूती हैं। यह हमारे अहंकार को भी झुकाती हैं और हमें यह याद दिलाती हैं कि हम अकेले नहीं हैं, बल्कि कई पीढ़ियों की धरोहर को अपने भीतर लेकर चल रहे हैं।
मान्यता है कि पितरों की प्रसन्नता से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। यही कारण है कि श्राद्ध पक्ष को ‘महालय’ भी कहा गया है, यानी महान अवसर। जब हम श्रद्धा से अपने पूर्वजों को याद करते हैं तो केवल उनकी आत्मा ही तृप्त नहीं होती, बल्कि हमारा मन भी हल्का और शुद्ध होता है। यह आत्मिक संवाद हमें आगे बढ़ने की ताक़त देता है।
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हम अक्सर अपने अतीत और पूर्वजों को भूल जाते हैं। लेकिन पितृपक्ष हमें याद दिलाता है कि हमारी हर उपलब्धि, हर सुविधा और हर संस्कार पीछे की पीढ़ियों की मेहनत और त्याग से जुड़े हुए हैं। चाहे वे खेत में हल चलाने वाले किसान रहे हों या शिक्षा की अलख जगाने वाले, उनके बिना हमारी पीढ़ी अधूरी है।
श्राद्ध केवल विधि-विधान का नाम नहीं है, बल्कि स्मृति और कृतज्ञता का पर्व है। जब हम अपने पितरों को याद करते हैं, तो यह भावना हमारे बच्चों तक भी पहुँचती है। वे भी सीखते हैं कि जीवन केवल आगे बढ़ने का नाम नहीं, बल्कि पीछे झुककर धन्यवाद देने का भी नाम है।
पितृपक्ष हमें यह सिखाता है कि पूर्वज केवल कहानियों का हिस्सा नहीं हैं, वे हमारे जीवन का आधार हैं। उनकी उपस्थिति हमारे भीतर है और उनकी उन्नति ही हमारी उन्नति है। श्राद्ध पक्ष का हर दिन हमें यह अवसर देता है कि हम मौन रहकर, जल अर्पित करके, पिंडदान करके और सबसे बढ़कर श्रद्धा से अपने पितरों को स्मरण करें।
जैसे दरख़्त की जड़ें अदृश्य होकर भी दरख़्त को संभाले रहती हैं, वैसे ही पितर हमारे जीवन को संबल देते हैं। इसीलिए पितृपक्ष केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन की सबसे गहरी सीख है। कृतज्ञ रहो, स्मृति को संजोए रखो और आगे बढ़ते समय अपनी जड़ों को मत भूलो।
जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। घरेलू विवाद के दौरान एक महिला ने अपने पति का गला दबाकर हत्या कर दी और फिर खुद थाने पहुंचकर पुलिस से कहा – “साहब, मैंने उसे मार डाला।”
मझली तालाब के पास हुई वारदात
घटना चांपा थाना क्षेत्र के मझली तालाब इलाके की है। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में पत्नी ने अपने पति का गला दबा दिया। मौके पर ही पति की मौत हो गई।
वारदात के बाद थाने पहुंची पत्नी
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद महिला सीधे थाने पहुंची और पुलिस को घटना की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।
पुलिस जांच जारी
फिलहाल पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है और मामले की गहन जांच की जा रही है। प्राथमिक जांच में घटना की वजह घरेलू विवाद बताई जा रही है।
महासमुंद। जिले के तुमगांव थाना क्षेत्र में सेक्स रैकेट का मामला सामने आया है। ग्रामीणों की सूचना और तत्परता से पुलिस ने 4 महिलाओं को पकड़कर हिरासत में लिया है। ये सभी महिलाएँ देह व्यापार में संलिप्त होने के आरोप में पकड़ी गईं।
ग्रामीणों ने पकड़ा, पुलिस को सौंपा
जानकारी के मुताबिक, ग्रामीणों ने एनएच-53 किनारे संदिग्ध गतिविधियों के चलते 4 महिलाओं को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। पकड़ी गई महिलाओं की उम्र 25 से 48 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
अलग-अलग जिलों से आई महिलाएँ
इन महिलाओं में से एक मुंबई, एक अंबिकापुर, एक रायपुर और एक धमतरी की रहने वाली है। सभी से पुलिस पूछताछ कर रही है।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में 3 महिलाओं के खिलाफ पीटा एक्ट (Prevention of Immoral Trafficking Act) के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं, अन्य 3 महिलाओं के खिलाफ धारा 151 (शांति भंग की आशंका) के तहत कार्रवाई की गई है।
जांच जारी
पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क कैसे और कहाँ से संचालित हो रहा था, इसकी जांच की जा रही है। ग्रामीणों की तत्परता से यह पूरा मामला उजागर हो सका।
भुवनेश्वर/नुआपाड़ा। नुआपाड़ा जिले से विधायक और ओडिशा सरकार के पूर्व योजना एवं समन्वय मंत्री श्री राजेंद्र धोलकिया का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे ओडिशा सहित राजनीतिक और सामाजिक जगत में शोक की लहर फैल गई है।
गरीबों और समाज के सच्चे साथी
श्री धोलकिया लंबे समय से नुआपाड़ा क्षेत्र की जनता की सेवा में सक्रिय थे। वे गरीबों और वंचितों के हितों के लिए हमेशा आवाज उठाते रहे। एक जनप्रिय नेता के रूप में उन्होंने न केवल राजनीतिक क्षेत्र में बल्कि सामाजिक कार्यों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।
श्रद्धांजलि संदेश
उनके निधन पर अनेक राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और आम जनता ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि “श्री राजेंद्र धोलकिया का जाना न केवल नुआपाड़ा बल्कि पूरे ओडिशा के लिए अपूरणीय क्षति है।”
अंतिम विदाई
परिवार के अनुसार, अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर जल्द ही जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में गमगीन माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने शोक प्रकट किया
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने एक्स पर ट्वीट कर राजेन्द्र ढोलकिया के निधन पर शोक प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर लिखा है कि महाप्रभु जगन्नाथ जी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। शोकाकुल परिवार के प्रति मेरी संवेदना है। दिवगंत आत्मा के लिए महाप्रभु श्री जगन्नाथ के समीप मैं प्रार्थना करता हूं।
जानकारी के मुताबिक राजेंद्र ढोलकिया का जन्म 20 नवंबर 1956 को हुआ था। पिता का नाम रसिकलाल ढोलकिया और माता का नाम कल्पना ढोलकिया था। राजू भाई के नाम से परिचित राजेन्द्र ढोलकिया ने 2004 में निर्दल चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
2009 और 2019 एवं 2024 में वह बीजू जनता दल के टिकट से नुआपड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर विधानसभा के सदस्य बने थे।
नवीन सरकार के पांचवें कार्यकाल में मंत्रीमंडल में नुआपड़ा के विधायक राजेंद्र ढोलकिया को कैबिनेट में शामिल किया गया था। राजेंद्र ढोलकिया ने नुआपड़ा से लगातार विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया।
जानकारी के अनुसार उनका पार्थिव शरीर चेन्नई से रायपुर लाया जाएगा और यहां से नुआपड़ा खरियार रोड लाया जाएगा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। राजेन्द्र ढोलकिया एक राजनेता के साथ ही महान समाजसेवी थे।
महाप्रभु श्री जगन्नाथ से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य दें।
दिल्ली। लाल किला के सामने 15 अगस्त पार्क में चल रहे जैन समाज के धार्मिक अनुष्ठान से चोरी हुए एक करोड़ से अधिक कीमत के कीमती कलश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके पास से सोना-हीरे जड़ा कलश भी बरामद कर लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपी का नाम भूषण वर्मा है, जो उत्तर प्रदेश के हापुड़ का रहने वाला बताया जा रहा है।
ऐसे चढ़े हाथ आरोपी
जानकारी के मुताबिक, कलश चोरी की वारदात के बाद पुलिस ने 10 टीमों का गठन किया था। शुरू में चार टीमें जांच में लगीं, बाद में स्पेशल स्टाफ, एएटीएस और एंटी नारकोटिक्स सेल समेत तेज-तर्रार पुलिस अधिकारियों को भी खोजबीन में लगाया गया।
जांच में पता चला कि आरोपी लगातार अनुष्ठान में शामिल हो रहा था और मौके की तलाश कर रहा था। जैसे ही उसे मौका मिला, उसने चोरी की वारदात को अंजाम दिया और वहां से निकल गया।
जैन समाज में रोष
इस घटना से पूरे जैन समाज में भारी आक्रोश फैल गया था। कलश की कीमत को दरकिनार कर भी देखा जाए तो यह समाज के लिए धार्मिक महत्व रखता था।
जिला पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने गिरफ्तारी से पहले ही संकेत दिए थे कि आरोपी का सुराग मिल चुका है और जल्द ही उसे दबोच लिया जाएगा।
लाल किला के सामने 15 अगस्त पार्क में 28 अगस्त से 9 सितंबर तक जैन समाज का धार्मिक अनुष्ठान चल रहा है। इसके लिए विशेष मंच तैयार किया गया है और इसमें धोती और अंगवस्त्र पहनकर ही शामिल होने की अनुमति है।
सिविल लाइंस के कारोबारी सुधीर जैन रोजाना पूजा के लिए यह कीमती कलश लेकर आते थे और मंच पर रखते थे। कलश में 760 ग्राम सोना, 150 ग्राम हीरे और माणिक्य-पन्ना जैसे कीमती रत्न जड़े हुए थे।
ऐसे हुई चोरी
मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। आयोजक और अन्य लोग उनके स्वागत में व्यस्त हो गए। इसी दौरान मौका पाकर आरोपी कलश लेकर फरार हो गया।
अब पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कीमती कलश सुरक्षित बरामद कर लिया गया है।
छत्तीसगढ़ मौसम रायपुर। रविवार रात राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद सोमवार को भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने रायपुर, महासमुंद, बलौदा बाजार, दुर्ग, सूरजपुर, नारायणपुर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। राजधानी में दिनभर बादल छाए रहने और हल्की-मध्यम बारिश की संभावना है।
छत्तीसगढ़ मौसम विभाग ने छत्तीसगढ़ के 22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। रविवार रात हुई बरसात के चलते तापमान गिरा और मौसम सुहावना हुआ। सोमवार को भी कई जिलों में तेज बारिश और अस्थायी रूप से बाढ़/निचले इलाके में जलभराव का खतरा बरकरार है — नागरिकों से आवश्यक सावधानी बरतने को कहा गया है।
रविवार रात कई जिलों में तेज बरसात हुई; तापमान में गिरावट दर्ज।
22 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी।
राजधानी रायपुर में हल्की-मध्यम बारिश और बदले मौसम का अनुमान।
निचले इलाकों/नदी किनारे रहने वालों को सतर्क रहने की सलाह।
सुरक्षा सलाह
बिजली गिरने/बिजली कटौती के संभावित घटनाओं के लिए चेतावनी।
खुले में खड़े न हों; बिजली गिरने का खतरा हो सकता है।
बाढ़-प्रवण/निचले इलाकों में वाहन न चलाएँ।
जरुरी सामान, दवाइयाँ और मोबाइल चार्जर साथ रखें।
मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
रूपेश टंडन. महासमुंद। तुमगांव थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे 53 के पास स्थित एक मकान में रविवार को स्थानीय लोगों ने देह व्यापार के संदेह में छापेमारी की। इस दौरान चार महिलाओं को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद इलाके में बड़ी भीड़ जमा हो गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह वही मकान है, जहां कुछ समय पहले नगर पंचायत अध्यक्ष पर छेड़छाड़ का आरोप दर्ज किया गया था। अब इसी घर में संदिग्ध गतिविधियों के उजागर होने से चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार पकड़ी गई महिलाएं रायपुर, धमतरी, अंबिकापुर और मुंबई (महाराष्ट्र) की हैं। यह मकान अनीता ढीढी का बताया जा रहा है, जिस पर पहले भी देह व्यापार में संलिप्त होने के आरोप लगे थे और जिसे पुलिस ने पहले गिरफ्तार भी किया था।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि अलग-अलग जिलों और शहरों से महिलाएं बार-बार इसी मकान में क्यों आती हैं। उनका आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से यह गतिविधि चल रही है, लेकिन पुलिस ने इसे रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रतिभा पांडेय खुद तुमगांव थाना पहुंची और महिलाओं से पूछताछ की। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महासमुंद. छत्तीसगढ़। ओडिशा के सोनपुर जिले के डेयरी किसानों से कथित उत्पीड़न का मामला सोशल मीडिया पर 20-21 दिन पुरानी खबर के रूप में वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट और वीडियो में कहा जा रहा है कि महासमुंद जिले की बलौदा चौकी के लगभग पूरे स्टाफ को 15 दिन के आसपास निलंबित कर दिया गया है और अन्य चौकियों से कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
हालांकि, मीडिया में इस मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि पुलिस कर्मचारियों द्वारा प्रार्थियों को अन्य केस में फंसाने की धमकी और पैसे की मांग की गई थी, जो गंभीर अपराध की श्रेणी में आते हैं।
विशेषज्ञ और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता यह मान रहे हैं कि अगर यह खबर सत्य है, तो संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया जाना चाहिए।
इस मामले पर मीडिया और प्रशासन की प्रतिक्रिया अभी नहीं मिली है। सोशल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसानों और उनके परिवार ने उच्च अधिकारियों को भी शिकायत दी है।
यह मामला सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन चुका है, लेकिन आधिकारिक रिपोर्ट और पुष्टि का इंतजार है। वेबसाइट पाठकों को सलाह देती है कि इस खबर को सूत्रों पर आधारित मानकर ही पढ़ें और साझा करें।
ये रहा ओडिशा की खबर
ओडिशा के सोनपुर जिले के किसान, जो गाय खरीदने के लिए छत्तीसगढ़ गए थे, का आरोप है कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने उन्हें रोककर उत्पीड़ित किया और पैसे वसूले। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सामने आई है, जिसे हजारों लोगों ने देखा और साझा किया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि किसान गायों के साथ जाने के दौरान पुलिस से भिड़ंत करते हैं। सोशल मीडिया पर कमेंट्स में लोग आरोप लगा रहे हैं कि पुलिस ने गाय खरीदने वाले किसानों से पैसे की मांग की और उन्हें धमकाया।
कुछ उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी की कि किसानों से अन्य मामलों में फंसाने की धमकी दी गई और इस घटना में पुलिस द्वारा कथित गलत व्यवहार किया गया।
हालांकि, छत्तीसगढ़ पुलिस ने अभी तक इस घटना पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।