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Ank shastr: 16 फरवरी शुक्रवार जानें अपना खास रंग और नंबर

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अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष Ank Jyotish आज

Ank shastr: 16 फरवरी शुक्रवार: अंकों के माध्यम से जातकों के विषय एवं उसके भविष्य को जानने की कोशिश किया जाता है। उदाहरण के लिए समझें यदि किसी मनुष्य का जन्म 25 अप्रैल को हुआ है तो उसकी जन्म तारीख के अंकों का योग 2+5=7 आता है। यानि 5 उस व्यक्ति का मूलांक कहा जाएगा। यदि किसी की जन्मतिथि 3 अंकों अर्थात 12  है तो उसका मूलांक 1+2= 3 होगा। जानें आज का अंक गणित Ank shastr

अंक 1

थोड़ा सा मानसिक तनाव रह सकता है। (Ank shastr) आप हर किसी से अपना काम निकलवाने में सफल होंगे। किसी अपरिचित पर विश्वास करना गलत निर्णय होगा। प्रेम और रोमांस के मामले में स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी।

शुभ अंक- 5

शुभ रंग- वायलेट

अंक 2

भावनाओं के भाव में बहने या लापरवाही से बचना चाहिए। (Ank shastr) स्वभाव में विनम्रता का भाव रखेंगे। परिवार के साथ सम्बन्ध मधुर बनेंगे। आर्थिक और व्यापारिक तौर पर शानदार सफलता मिल सकती है।

शुभ अंक- 12

शुभ रंग- सफेद

अंक 3

पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त रह सकते हैं। (Ank shastr) साझेदारी पर सोच समझकर निर्णय लें। मान-सम्मान में वृद्धि होगी। संतान के साथ आप उसके स्कूल या कॉलेज जा सकते हैं।

शुभ अंक- 10

शुभ रंग- भूरा

अंक 4

आज आपको कुछ मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। (Ank shastr) आमदनी से ज्यादा खर्च बढ़ने से परेशानी आएगी, खर्च के लिए संतुलित बजट बनाएं और सामाजिक दायरा सीमित रखें। परिवार व मित्र आपको खुशियां प्रदान करेंगे।

शुभ अंक- 3

शुभ रंग- पीला

अंक 5

गुप्त शत्रुओं में वृद्धि हो सकती है। (Ank shastr) फिर भी आपका पराक्रम बढ़ेगा। संतान से संतुष्टि प्राप्त करेंगे।  धन लाभ के कई अवसर हाथ लगेंगे। दिन की शुरूआत आप जोरदार ढंग से करेंगे। आसपास की यात्रा पर जा सकते हैं।

शुभ अंक- 2

शुभ रंग- हरा

अंक 6

आपको आज अपने कुछ विवादों को बहुत ही सूझबूझ तरीके से हल करना होगा। (Ank shastr) अपनी बातचीत में सावधानी बरतनी होगी। आप आर्थिक मसलों पर गंभीरता से विचार करेंगे। स्वास्थ्य के प्रति चिंताग्रस्त रहेंगे। पारिवारिक समस्याएं सुलझेंगी।

शुभ अंक- 10

शुभ रंग- हरा

अंक 7

परिवार के साथ शानदार समय व्यतीत होगा। (Ank shastr) आपको अध्यात्मिक जगत भी आकर्षित करेगा। रोमांस में स्थितियां आपके पक्ष में रहेंगी। नौकरीपेशा जातकों को नौकरी में अच्छे अवसरों की प्राप्ति हो सकती है।

शुभ अंक- 1

शुभ रंग- सुनहरा

अंक 8

घर परिवार के कामों पर ध्यान दे पाएंगे। (Ank shastr) स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें वरना पुरानी बीमारियां परेशान कर सकती हैं। माता-पिता, बच्चों, रिश्तेदारों से सम्बन्ध मजबूत होंगे। अपने काम को नीतिपूर्ण ढंग से पूरा करेंगे।

शुभ अंक- 15

शुभ रंग- नांरगी

अंक 9

धन सम्बन्धी मामलों में आपको अच्छी सफलता हासिल होगी। (Ank shastr) सम्पत्ति में निवेश सोच समझकर करें तभी बेहतर होगा। सतर्क होकर कार्य करने की जरूरत है। मित्र वर्ग आपको अच्छा सहयोग प्रदान करेंगे।

शुभ अंक- 5

शुभ रंग- पीला

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CG करोड़ों के शराब घोटाले फंसे में AP  त्रिपाठी को मिली जमानत

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में आबकारी विभाग के निलंबित अफसर अरुणपति त्रिपाठी को बिलासपुर हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत याचिका को मंजूर किया है। दरअसल, बुधवार को इस केस की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर गुरुवार को ऑर्डर जारी किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शराब घोटाले मामले में मई 2023 में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शराब वितरण कंपनी सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुण पति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ कर ईडी की विशेष अदालत ने जेल भेज दिया था।

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अरुण पति त्रिपाठी ने अपने एडवोकेट के माध्यम से विशेष अदालत में जमानत अर्जी लगाई थी। जिसे खारिज कर दिया गया। जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी जमानत याचिका दायर की थी। जिसमें राहत नहीं मिली, तब हाईकोर्ट में दोबारा जमानत अर्जी लगाई। अरुण पति त्रिपाठी छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी विभाग के विशेष सचिव हैं। पहले वे छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी भी रहे हैं।

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AP त्रिपाठी इंडियन टेलीकॉम के ऑफिसर हैं, जो डेपुटेशन पर छत्तीसगढ़ में कार्यरत हैं। पहले छत्तीसगढ़ के दूरसंचार उद्योग में ग्राहक प्रति धारणा से संबंधित विषय को लेकर उन्होंने शोध किया था। जिसके बाद छत्तीसगढ़ के डॉक्टर सीवी रमन यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें पीएचडी प्रदान की गई थी।

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जानें क्या है चुनावी ब्रांड, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब नेता नहीं छूपा पाएंगे अपना राज!

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सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड (electoral bond) पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक माना है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ कर रही थी, जिसकी अगुवाई खुद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ चुनावी बॉन्ड (electoral bond)  को अवैधानिक बताया है, बल्कि अब तक इसे कितने लोगों ने खरीदा है, किन पार्टियों को चंदा दिया गया है, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए SBI  को तीन सप्ताह का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चार याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी। CJI डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली 05 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ पिछले साल से ही मामले को सुन रही थी। (electoral bond)  इस पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा भी रहे। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने 29 अक्टूबर 2023 को हलफनामा पेश किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2023 से 2 नवंबर 2023 तक तीन दिनों तक सभी पक्षों को सुना था और अब फैसला दिया है।

अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनावी बॉन्ड (electoral bond)  योजना पारदर्शिता की कमी, दानदाताओं की गुमनामी और राजनीतिक दलों पर अमीर व्यक्तियों और कंपनियों के प्रभाव के कारण लोकतंत्र के लिए खतरा है। न्यायालय ने यह भी कहा कि योजना कानून के तहत स्थापित मौजूदा नियामक ढाँचे को कमजोर करती है। चुनावी बॉन्ड योजना एक विवादास्पद मुद्दा रहा है। इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क हैं। यह अभी भी देखा जाना बाकी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भारतीय लोकतंत्र पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

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Electoral Bonds

चुनावी बॉन्ड कैसे करता है काम?

चुनावी बॉण्ड को साल 2017 में एक वित्त विधेयक के माध्यम से पेश किया गया था। सरकार ने इसे 2 जनवरी 2018 में लागू किया। इससे उन्हीं पार्टियों को फायदा होता है, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हों। यही नहीं, उस राजनीतिक पार्टी को लोकसभा या विधानसभा के ताजे चुनाव में कम से कम 1 प्रतिशत वोट भी हासिल करना होता है, तभी वो चुनावी बॉन्ड पा सकते हैं।

चुनावी बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की चुनिंदा शाखाओं से 1,000 रुपये, 10,000 रुपये, 1 लाख रुपये और 1 करोड़ रुपये के मूल्यवर्ग में खरीदे जा सकते हैं। एसबीआई की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया था। ये शाखाएँ नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गाँधीनगर, चंडीगढ़, पटना, राँची, गुवाहाटी, भोपाल, जयपुर और बेंगलुरु में हैं। राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड को 15 दिनों के भीतर एसबीआई में भुनाना होता है, और इस राशि की जानकारी चुनाव आयोग को देनी होती है। हालाँकि वो अपने दानदाताओं के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते।

सरकार ने दावा किया कि यह योजना राजनीतिक दलों के लिए धन जुटाने का एक पारदर्शी तरीका प्रदान करेगी और काले धन के इस्तेमाल को कम करेगी। यह राजनीतिक दलों के लिए धन जुटाने का एक पारदर्शी तरीका प्रदान करता है। यह काले धन के इस्तेमाल को कम करने में मदद करता है। यह राजनीतिक दलों को व्यक्तियों और कंपनियों से अधिक स्वतंत्रता प्रदान करता है।

चुनावी बॉन्ड खरीदकर किसी पार्टी को देने से ‘बॉन्ड खरीदने वाले’ को कोई फायदा नहीं होगा। न ही इस पैसे का कोई रिटर्न मिलता है। ये अमाउंट पॉलिटिकल पार्टियों को दिए जाने वाले दान की तरह है, ऐसे में इससे 80जीजी 80जीजीबी के तहत इनकम टैक्स में छूट मिलती है। हालाँकि चुनावी बॉन्ड को लेकर तमाम आशंकाएँ भी जताई जा रही थी।

चुनावी बॉन्ड के खिलाफ गईं कौन सी बातें?

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को इलेक्शन कमीशन के समक्ष इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी देनी होगी। इसके साथ दलों को बैंक डीटेल्स भी देना होगा। अदालत ने कहा है कि राजनीतिक दल,आयोग को एक सील बंद लिफाफे में सारी जानकारी दें, लेकिन ये मामला केवल यहीं नहीं थमा बल्कि इस पूरे चुनावी बॉन्ड स्कीम की वैधता को ही चुनौती दी गई।

दरअसल, चुनावी बॉन्ड (electoral bond)  को लेकर सबसे बड़ी परेशानी इसके माध्यम से पैसे दे रहे लोगों के बारे में जानकारी का सार्वजनिक न होना है। आरटीआई के माध्यम से भी इसकी जानकारी नहीं दी जा रही थी, और बोला जाता था कि ये सूचना आम नागरिकों के लिए है ही नहीं। ऐसे में कौन ये बॉन्ड खरीद रहा है और किस पार्टी को इस माध्यम से दान दे रहा है, ये जानकारी कभी बाहर ही नहीं आ पाती थी।

एक आँकड़े के मुताबिक, चुनावी बॉन्ड के जरिए अब तक 5851 करोड़ रुपए जुटाए जा चुके हैं। सिर्फ मई 2023 में ही 822 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड जारी किए गए। वहीं, पिछले लोकसभा चुनाव के समय जनवरी से मई 2019 तक 4794 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी किए गए। ये चुनावी बॉन्ड हर साल दो बार जारी किए जाते हैं। आम तौर पर चुनाव के समय। साल 2018 से अब तक इसे 11 बार जारी किया जा चुका है। इसके माध्यम से राजनीतिक पार्टियों को 5851 करोड़ रुपए का चंदा मिला।

कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब नेता नहीं छूपा पाएंगे अपना राज!   

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कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब नेता नहीं छूपा पाएंगे अपना राज!   

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बड़ा फैसला सुनाया है, इस फैसले के दायरे में सभी राजनीतिक दल आ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने राजनैतिक पार्टियों को चुनावी बॉन्ड के ज़रिए मिलनेवाले चंदे पर रोक लगा दी है। Electoral bond के ज़रिए चंदा देनेवालों के नाम, SBI को चुनाव आयोग को देने होंगे और चुनाव आयोग उन नामों की लिस्ट को अपनी website पर साझा करेगा। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को जेएमएम ने ऐतिहासिक बताया है. वहीं जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि आज के दिन की तारीख बड़ी है. सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है. चुनावी बॉन्ड के माध्यम से शुरू हुआ, काले से सफेद के कारनामे पर लगाम लग गयी है।

2014 के बाद पूंजीपतियों की रक्षा में जुटी केंद्र सरकार 2014 के बाद पूंजीपति लोगों की कैसे रक्षा की जाये इसके लिए चुनावी बॉन्ड की शुरुआत की गई, 2014 से पहले नरेंद्र मोदी पूरे देश का भ्रमण कर रहे थे और एक विशेष विमान मिला था। वह विमान एक विशेष समूह ने दिया था. उस समूह का नाम अदानी था. पूर्व वित्त मंत्री ने 2017 में एक कानून बनाया. चुनावी बॉन्ड को इस तरीके से पेश किया गया जैसे कोई क्रांतिकारी कदम है.

SBI को यह चुनावी बॉन्ड जारी करने का काम दिया गया था. और उस बॉन्ड को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है और किसी भी पार्टी को दे सकता है. इस बॉन्ड पर सभी ने आपत्ति जतायी थी. लेकिन उसके बाद 2018 में इसे जारी कर दिया गया इसे RTI से भी अलग रखा गया. सुप्रीम कोर्ट ने सभी कानूनों को खारिज कर दिया है.

13 मार्च ऐतिहासिक दिन होगा जब देश बेचने और खरीदनेवालों के नाम सामने आयेगा अब सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआइ को तीन सप्ताह के अंदर चुनावी बॉन्ड खरीदने वालों के नाम जारी करने का निर्देश दिया है. यह सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला है. देश बेचने वाले लोग चुनाव के समय सामने आयेंगे. 13 मार्च ऐतिहासिक दिन होगा जब देश बेचने और खरीदनेवालों के नाम सामने आयेंगे

सुप्रीम कोर्ट का फैसला एतिहासिकः

सीपीआइएम सुप्रीम कोर्ट की ओर से गुरुवार को इलेक्टोरल बांड को असंवैधानिक करार दिया. सीपीआइएम की और से सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को एतिहासिक बताया गया. इस संबंध में सीपीआइएम केंद्रीय कमेटी के सदस्य प्रकाश विप्लव ने कहा कि इस फैसले ने अज्ञात कॉरपोरेट दाताओं द्वारा सत्ताधारी पार्टी का खजाना भरने के लिए बनायी गयी इस योजना को पूरी तरह से खारिज कर दिया है.

सीपीआइएम ने खुद शुरुआत में घोषित किया था कि पार्टी चुनावी बांड स्वीकार नहीं करेगी क्योंकि यह योजना भ्रष्टाचार को वैध बनाती है. सीपीआइएम ने अन्य याचिकाकर्ताओं के साथ सुप्रीम कोर्ट में चुनावी बांड योजना को चुनौती दी थी. यह स्पष्ट है कि इस योजना के खिलाफ दायर याचिका के सभी मुख्य आधारों को फैसले में बरकरार रखा गया है. प्रकाश विप्लव ने कहा कि यह आवश्यक है कि पारदर्शिता, पैसे और चुनाव में बराबरी का मैदान सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक और चुनावी अनुदान के लिए जनवादी सुधारों को सामने लाया जाये।

lok sabha election 2024: इस तारीख को चुनाव , तैयारी शुरू

दुर्ग पार्षद पर 20 रुपए रिश्वत लेने का आरोप, देखें वीडियो

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lok sabha election 2024: इस तारीख को चुनाव , तैयारी शुरू

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lok sabha election 2024: दिल्ली। कुछ ही महीने बाद देश में होने वाले लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों में होने वाले विधानसभा को लेकर चुनाव आयोग (EC) ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. चुनाव आयोग कल से देश में होने वाले आम चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने विभिन्न राज्यों का दौरा शुरू कर रहा है.

इसी सिलसिले में आयोग 16 और 17 फरवरी को उड़ीसा का दौरा करेगा, जबकि बिहार में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए आयोग की टीम 19 से 21 फरवरी तक रहेगी. इसके अलावा चुनाव आयोग इसी महीने दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु का भी दौरा करेगा. आयोग की टीम 23 और 24 फरवरी को तमिलनाडु दौरे पर रहेगी, जहां वो आगामी आम चुनाव के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा करेगी.

इससे पहले चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से 3.4 लाख CAPF कर्मियों की मांग की थी. आंध्र प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा में विधानसभा सभा चुनाव के मद्देनजर आयोग ने केंद्र सरकार से CAPF फोर्स मांगी है. चुनाव आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव और आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और सिक्किम में विधानसभा चुनावों के दौरान चरणबद्ध तरीके से तैनाती के लिए 3.4 लाख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कर्मियों की मांग की है.

जब हाईवे 63 पर ऑटो और बाइक में हुई जोरदार टक्कर, मचा अफरातफरी

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दुर्ग पार्षद पर 20 रुपए रिश्वत लेने का आरोप, देखें वीडियो

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छत्तीसगढ़ दुर्ग। यहां रिसाली निगम की वार्ड 15 की पार्षद और MIC सदस्य ईश्वरी साहू पर लगे रिश्वत लेने का  आरोप लगा है, महतारी वंदन योजना से जुड़े दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के एवज में 20 रुपए लेने का आरोप लगा है, जिसका Video वायरल हो रहा है। वीडियो में एमआईसी सदस्य ईश्वरी साहू ने कहा कि 9 बजे से रात 11 बजे तक काम करती हूं, वहीँ वीडियो वायरल होने के बाद BJP पार्षद धमेंद्र भगत ने संभाग आयुक्त से लिखित शिकायत की है, इसके साथ ही पार्षद पद से बर्खास्त करने की मांग की है।

यहां देखें वीडियो

जब हाईवे 63 पर ऑटो और बाइक में हुई जोरदार टक्कर, मचा अफरातफरी

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जब हाईवे 63 पर ऑटो और बाइक में हुई जोरदार टक्कर, मचा अफरातफरी

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छत्तीसगढ़ हाईवे 63  जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-63 पर एक तेज रफ्तार बाइक व ऑटो के बीच भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार मेडिकल स्टूडेंट को गंभीर चोट आई, वहीं ऑटो तेज रफ्तार होने के कारण अनियंत्रित होकर पलट गई। इस ऑटो में सवार लोगों में अफरातफरी के साथ चीख-पुकार मच गई। इस वाहन में परिवहन नियमों का उल्लघंन करते हुए  9 यात्री बिठाया था।

कई गंभीर

घायलों को यातायात पुलिस की हाइवे पेट्रोलिंग वाहन की मदद से मेकाज में एडमिट  किया गया। पुलिस के अनुसार, कोड़ेनार थाना क्षेत्र के रायकोट निवासी महिलाएं जिसमें इतवारी 18 वर्ष, मासरी 16 वर्ष, फूलमती 40 वर्ष, दयमती 23 वर्ष, अनिता 25 वर्ष, ऑटो चालक सोनाधर के अलावा अन्य 3 महिलाए जो कुली मजदूरी करने के लिए ऑटो में सवार होकर धरमपुरा जा रहे थे।

तभी अचानक BR कोल्ड स्टोरेज के पास सामने से बाइक में आ रहे मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी के साथ आमने-सामने टकरा गए। इस हादसे में मेडिकल विद्यार्थी के सिर में गंभीर चोट आई, वहीं ऑटो के पलटने की सूचना पर हाइवे पेट्रोलिंग स्टाफ के द्वारा मेकाज में भर्ती किया गया।

चुनावी बॉन्ड पर रोक… सुप्रीम कोर्ट सख्त, चंदा बन सकता है रिश्वत का माध्यम, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

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चुनावी बॉन्ड पर रोक… सुप्रीम कोर्ट सख्त, चंदा बन सकता है रिश्वत का माध्यम, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

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Electoral Bonds

Electoral Bonds: सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि चंदा रिश्वत का जरिया भी बन सकता है जिससे सरकारी नीतियां प्रभावित हों. (Electoral Bonds) इससे पहले CJI ने साफ किया कि फैसले भले ही अलग-अलग हों लेकिन पूरी बेंच का निष्कर्ष एक ही है. कोर्ट ने इस पर विचार किया कि क्या दानकर्ता की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत आती है? कोर्ट ने कॉरपोरेट कंपनी पर इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा देने की निर्धारित सीमा को हटाने पर भी विचार किया है. पढ़िए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें-

  1. कोर्ट ने माना कि इलेक्ट्रोरल बॉन्ड स्कीम वोटर के जानने के अधिकार का हनन करती है. बेंच ने माना कि ये स्कीम वोटरों के आर्टिकल 19 (1) A का उल्लंघन करती है.
  2. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस स्कीम के जरिए ब्लैक मनी पर लगाम कसने की दलील देकर वोटरों के दलों की फंडिंग के बारे में जानने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
  3. इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि चंदा रिश्वत का जरिया भी बन सकता है.
  4. कोर्ट ने कॉरपोरेट कंपनी पर इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा देने की निर्धारित सीमा को हटाने के सरकार के फैसले को मनमाना और गलत करार दिया. कोर्ट ने फैसला दिया कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पर तुरंत रोक लगे.
  5. कोर्ट ने SBI को निर्देश दिया है कि वह खुलासा करे कि किस राजनीतिक पार्टी को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कुल कितना चंदा दिया गया है. SBI ये जानकारी EC को देगा. चुनाव आयोग 31 मार्च तक पूरी जानकारी वेबसाइट पर डालेगा. अभी तक जिन राजनीतिक दलों ने बॉन्ड को कैश नहीं कराया, वे बैंक को वापस देंगे.

इससे पहले राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लाने के लिए पार्टियों को दिए जाने वाले दान के विकल्प के रूप में इस योजना को पेश किया गया था. हालांकि कांग्रेस नेता जया ठाकुर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. (Electoral Bonds) सुनवाई पूरी कर चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने पिछले साल दो नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. इस संविधान पीठ में जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस बी. आर. गवई, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं.

वोटर का हक Vs दानकर्ता की गोपनीयता

इससे पहले संविधान पीठ ने तीन दिन तक सरकार और याचिकाकर्ता पक्ष की दलीलों को सुना था. कोर्ट में पूरी बहस चंदे के बारे में वोटरों के जानने के हक बनाम चंदा देने वाले दानकर्ता की पहचान गोपनीय रखने की दलीलों पर केंद्रित रही. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हम इस स्कीम को लाने के पीछे सरकार की मंशा पर संदेह नहीं कर रहे हैं. हम भी नहीं चाहते कि कैश के जरिए चंदा देने की पुरानी व्यवस्था फिर लौटे. हम चाहते हैं कि मौजूदा स्कीम की खामियों को दुरुस्त करके बेहतर किया जाए.

सुप्रीम कोर्ट में क्यों गया मामला

याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील प्रशांत भूषण, कपिल सिब्बल, शादान फरासत और निजाम पाशा ने दलीलें रखीं. उन्होंने कहा था कि चुनावी बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के सोर्स का पता नहीं चलता. अगर वोटरों को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के आपराधिक अतीत, उनकी चल-अचल संपत्ति के बारे में जानकारी रखने का हक है तो उन्हें यह भी जानने का हक है कि किसी राजनीतिक पार्टी को किसी कॉरपोरेट कंपनी से कितना चंद मिला, लेकिन ये स्कीम उनके मूल अधिकारों का हनन करती है.

‘सत्तारूढ़ पार्टी को सबसे ज्यादा चंदा’

याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क रखा गया था कि साल 2016-17 और 2021-22 के बीच 7 राष्ट्रीय और 24 क्षेत्रीय पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए कुल 9188.35 करोड़ का चंदा मिला है. इनमें से अकेले बीजेपी को 5,271.9751 करोड़ का चंदा मिला. कांग्रेस को 952.2955 करोड़, वहीं AITC को 767.8876, NCP को 63.75 करोड़ रुपये का चंदा चुनावी बॉन्ड के जरिए मिला.

‘सरकार को घूस देने का जरिया’

याचिकाकाकर्ताओं ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 99% से ज्यादा चंदा सत्तारूढ़ पार्टियों को मिला है. ये सत्तारूढ़ पार्टियों को घूस देने का जरिया बन गया है. (Electoral Bonds) यह घूस जाहिर तौर पर सरकार की नीतियों और फैसलों को प्रभावित करती है. सरकारी ठेके, लीज, लाइसेंस के तौर पर कंपनियों को फायदा पहुंचना सुनिश्चित करके सरकार कहीं ज्यादा चंदा इस एवज में वसूल सकती है. ये लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है क्योंकि ये राजनीतिक दलों में असमानता को बढ़ावा देती है.

‘चुनाव आयोग और RBI को भी एतराज’

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि चुनाव आयोग और आरबीआई भी इस स्कीम को लेकर ऐतराज जाहिर कर चुके हैं. इस स्कीम के जरिए संभावना बनती है कि सिर्फ राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए ही शेल कंपनियां बनाई जाएं. विदेशी कंपनियां चाहें तो अपनी सहायक कंपनियों के जरिए इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा दे सकती हैं. सरकार चाहे तो SBI और जांच एजेंसियों के जरिए दानकर्ता की जानकारी हासिल कर सकती है, पर वोटर नहीं.

सुप्रीम कोर्ट के अहम सवाल

– सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस स्कीम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें गोपनीयता सीमित ही है.

– इस स्कीम के चलते विपक्षी दलों को नहीं पता चल पाएगा कि कौन सत्तारूढ़ पार्टी को चंदा दे रहा है, पर सत्तारूढ़ पार्टी अपनी जांच एजेंसियों के जरिए ये पता करा सकती है कि कौन उन्हें या विपक्षी पार्टियों को चंदा दे रहा है.

– कोर्ट ने ये भी सवाल किया कि जब हरेक पार्टी को पता है कि चंदा देने वाला कौन है, फिर सिर्फ वोटर को इस जानकारी से वंचित रखने का क्या औचित्य है? वोटर को क्या ये जानने का हक नहीं है किस पार्टी को किसने चंदा दिया.

– कोर्ट ने कॉरपोरेट कंपनी पर चुनावी बॉन्ड के जरिए चंदा देने की निर्धारित सीमा को हटाने पर भी सवाल किया. दरअसल, पहली व्यवस्था के मुताबिक कोई भी कंपनी पिछले 3 साल के अपने शुद्ध मुनाफे के वार्षिक औसत का 7.5% से ज्यादा चंदा राजनीतिक दलों को नहीं दे सकती थी, लेकिन अब इलेक्टोरल बॉन्ड के लिए इस बाध्यता को खत्म कर दिया गया है.

– चीफ जस्टिस ने कहा कि कंपनियों के चंदे को सीमित करने के पीछे की वाजिब वजह थी. कंपनी होने के नाते आपका काम बिजनस करना है, चंदा देना नहीं और इसके बावजूद आप चंदा देना चाहते हैं तो ये छोटा ही होना चाहिए, लेकिन अब 1% मुनाफा कमा कर रही कंपनी भी एक करोड़ चंदा दे सकती है.

सरकार की दलील

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम चुनाव में ब्लैक मनी के इस्तेमाल को रोकने के लिए लाई गई है. इस स्कीम के जरिए ये सुनिश्चित किया गया है कि राजनीतिक दलों को बैंकिंग माध्यम के जरिए सिर्फ सही तरीके से कमाया गया पैसा ही पहुंचे. (Electoral Bonds) सरकार ने काले धन पर लगाम लगाने के लिए डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने जैसे जो दूसरे कदम उठाए हैं, उनमें से ये भी एक अहम कदम है.

‘पहले चंदा कैश में होता था’

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम का मकसद पारदर्शिता और दानकर्ताओं के हितों के बीच संतुलन कायम करना है. जब तक इसके जरिए चंदा देने की व्यवस्था नहीं थी, चंदा देने वाले राजनीतिक मुश्किलों से बचने के लिए कैश चंदा देने को मजबूर थे लेकिन अब गोपनीयता होने के चलते वह इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा दे सकते हैं.

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Electoral Bonds

‘दानकर्ता के हितों की सुरक्षा जरूरी’

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट को सरकार की मंशा देखनी चाहिए. (Electoral Bonds) सरकार नहीं चाहती कि उसे राजनीतिक दलों को चंदा देने वाले दानकर्ताओं का पता चले. हरेक पार्टी को यह तो पता होता ही है कि उसे किसने चंदा दिया, लेकिन गोपनीयता दूसरी पार्टी के दानकर्ताओं के बारे में होनी जरूरी है ताकि दानकर्ता को परेशानी नहीं हो. अगर सत्तारूढ़ पार्टी को यह पता चलता है कि किसी दानकर्ता ने चंदा विपक्षी पार्टी को दिया है तो यह उसके लिए ,उसके कारोबार के लिए मुश्किल की वजह बन सकती है. तुषार मेहता ने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि इस स्कीम के पीछे मकसद ये है कि अगर तुषार मेहता कांग्रेस को चंदा दे रहे तो ये बात सत्तारूढ़ बीजेपी को न पता चले ताकि उन्हें कोई परेशानी न झेलनी पड़े.

कोर्ट की इजाजत के बाद ही दानकर्ता की जानकारी

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर जांच एजेंसियां भी दानकर्ता की जानकारी चाहती हैं तो ये कोर्ट के आदेश के बाद ही संभव है. अगर किसी को व्यापक जनहित में चंदा देने वाले दानकर्ता की जानकारी चाहिए भी तो इसके लिए कोर्ट जाने का रास्ता खुला है, पर किसी की उत्सुकता शांत करने के लिए दानकर्ता की निजता के हनन की इजाजत नहीं दी जा सकती.

‘सबको समान चंदा नहीं मिल सकता’

वोटर के जानने का हक के सवाल पर एसजी तुषार मेहता ने दलील रखी थी कि वोटर इस आधार पर वोट नहीं देता कि किस पार्टी को किससे कितना फंड मिला है. (Electoral Bonds) वोटर पार्टी की विचारधारा, काबिलियत और नेतृत्व को देखकर वोट देता है. इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम में कुछ कमियां हो सकती हैं लेकिन दूर करने की कोशिश लगातार की जा रही है, लेकिन ये हकीकत है कि हरेक पार्टी को समान चंदा नहीं मिल सकता, उन्हें ज्यादा चंदा पाने के लिए अपने स्तर को उठाना होगा. एक औसत भारतीय वोटर फिर चाहे वो कॉरपोरेट हो या अशिक्षित, सोच-समझकर फैसला लेता है. हो सकता है कि वह साल 2013 में सत्तारूढ़ पार्टी को चंदा ना दे क्योंकि वो जानता है कि अगले साल 2014 से किसकी हवा चलने वाली है.

Abu Dhabi Hindu Mandir: मनमोह लेंगी अबू धाबी मंदिर की ये तस्वीर, खूबसूरती देख आप भी हो जाएंगे फैन

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Abu Dhabi Hindu Mandir: मनमोह लेंगी अबू धाबी मंदिर की ये तस्वीर, खूबसूरती देख आप भी हो जाएंगे फैन

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Abu Dhabi

BAPS First Hindu Temple In Abu Dhabi: अबू धाबी में BAPS का पहला हिंदू मंदिर का उद्घाटन बीते दिन यानी 14 फरवरी को प्रधानमंत्री द्वारा किया गया. (Hindu Temple) मंदिर की अंदर की तस्वीरें आपका भी मनमोह लेंगी. फोटोज में देखें अंदर से कैसे दिखता है ये भव्य मंदिर.

पर्यटकों के लिए खुला अबू धाबी का मंदिर

अबू धाबी में  BAPS का पहला हिंदू मंदिर बन कर तैयार है. PM मोदी द्वारा मंदिर का उद्घाटन कर दिया गया है और इसे पर्यटकों के लिए भी खोल दिया जाएगा. बता दें मंदिर को बनने में 3 साल का समय लगा और ये BAPS का अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर है.

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मिलेगी भारत की झलक

अबू धाबी में बने इस हिंदू मंदिर (Hindu Temple) में आपको कई जगह भारत की झलक देखने को मिलेगी. बता दें कि मंदिर में गंगा-यमुना का पवित्र जल, राजस्थान का बलुआ गुलाबी पत्थर, भारत से पत्थरों को लाने में इस्तेमाल की जाने वाली लकड़ी से मंदिर का फर्नीचर बनाया गया है. अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर देश के विभिन्न हिस्सों के योगदान से बना वास्तुकला का चमत्कार है.

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वाराणसी के घाट की झलक

बता दें कि इस ऐतिहासिक मंदिर (Hindu Temple) के प्रमुख स्वंयसेवी विशाल पटेल ने बताया कि मंदिर के दोनों तरफ गंगा और यमुना का जल बहता दिख जाएगा. इसके पीछे का विचार इसे वाराणसी के घाट की तरह दिखाना है. जहां लोग बैठ सकें. ध्यान लगा सकें और उनके जहन में भारत में बने घाटों की यादें ताजा हो जाएं.

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महंत स्वामी महाराज ने किया स्वागत

अबू धाबी मंदिर परिसर में प्रवेश के बाद PM मोदी ने बीएपीएस संस्था के छठे और वर्तमान आधायत्मिक गुरू परम पूजीय महंत स्वामी महाराज जी का आशीर्वाद लिया. इससे पहले वे महंत स्वामी महाराज से मिले. पीएम मोदी ने अबू धाबी में बने पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन कर दिया है. राम मंदिर के बाद मुस्लिम देश में ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा कर पर्यटकों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं. मंदिर में पहुंच कर BAPS के संतों ने पीएम मोदी का माला पहना कर स्वागत किया.

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27 एकड़ में बना है मंदिर

बता दें कि दुबई-अबू धाबी शेख जायेद हाइवे पर अल रहबा के समीप स्थित बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) द्वारा निर्मित यह मंदिर करीब 27 एकड़ जमीन पर बनाया गया है. बलुआ पत्थर की पृष्ठभूमि पर उत्कृष्ट संगमरमर की नक्काशी है, जिसे राजस्थान और गुजरात के कुशल कारीगरों द्वारा 25,000 से अधिक पत्थर के टुकड़ों से तैयार किया गया है.

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स्वामीनारयण भगवान की होगी पूजा

BAPS मंदिर संयुक्त अरब अमीरात में पहला हिंदू मंदिर है. बताया जा रहा है कि ये अबू धबी का ये मंदिर भगवान स्‍वामीनारायण को समर्पित है. इसके अलावा, यहां सीता-राम, लक्ष्मण जी, हनुमान जी, शिव-पार्वती का विग्रह, राधा-कृष्ण, श्री गणेश, जगन्नाथ स्वामी और भगवान अयप्पा की पूजा की जाएगी. ​

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Abu Dhabi Hindu Mandir

बेहद खूबसूरत है मंदिर की नक्काशी

अबू धाबी मंदिर (Hindu Temple) की अगर अंदर की फोटोज देखेंगे, तो आपको खुद ही अंदाजा लगा जाएगा कि मंदिर की नक्काशी वाकई बेहद खूबसूरत है. संगमरमर से दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियों को उकेरा गया है. फोटो में दिख रहे गुंबद को अगर आप ध्यान से देखेंगे, तो दिखेगी कि संगमरमर से शंख, सूर्य देव आदि को बनाया गया है.

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मौसम: रिटर्न हो रहा बारिश, छत्तीसगढ़, MP, ओडिशा समेत यहां बिगड़ सकता है मौसम

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मौसम

मौसम। IMD के अनुसार, देश के अलग-अलग हिस्सों में आज बारिश की संभावना है. 19 से 21 फरवरी के बीच छिटपुट बारिश होने की उम्मीद है. वहीं, ओडिशा में 1 या 2 जगहों पर घना कोहरा छा सकता है. छत्तीसगढ़ में इन दिनों न्यूनतम तापमान में बढ़ोतरी के चलते ठंड कम हो रही है। वहीं, दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी से इन दिनों प्रचुर मात्रा में नमी आ रही है। इसके प्रभाव से गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में हल्की वर्षा के आसार है।

जानें आज कैसा रहेगा मौसम?

स्काईमेट वेदर रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार, झारखंड, नॉर्थ छत्तीसगढ़ और सिक्किम में हल्की से मीडियम बारिश हो सकती है. वहीं, नॉर्थ-ईस्ट मध्य प्रदेश, वेस्ट बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में एक या दो जगहों पर हल्की बारिश की संभावना है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, नॉर्थ राजस्थान और वेस्टर्न यूपी के कुछ इलाकों में 19 से 21 फरवरी के बीच छिटपुट बारिश होने की उम्मीद है. वहीं, ओडिशा में 1 या 2 जगहों पर घना कोहरा छा सकता है.

कहां-कहां होगी बर्फबारी?

वहीं, जम्मू कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान, लद्दाख, मुजफ्फराबाद, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में 17 फरवरी से बारिश और बर्फबारी शुरू हो सकती है. यह बर्फबारी आगे 21 फरवरी तक जारी रह सकती है. हालांकि, पहाड़ों पर मौजूद टूरिस्ट बर्फबारी का खूब मजा ले रहे हैं.

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Weather

फिर बिगड़ गया मौसम

गौरतलब है कि पिछले 24 घंटे में नॉर्थ-ईस्ट एमपी, ईस्टर्न उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में हल्की से मीडियम बारिश हुई है. यहां बादल भी गरजे हैं. वहीं, नार्थ मध्य प्रदेश, राजस्थान और तमिलनाडु में एक-दो जगहों पर हल्की बारिश हुई है. पंजाब और ईस्टर्न उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में मीडियम बारिश हुई है.

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