Homeमेरा गांव मेरा शहर"छोटी मछलियों का शिकार, बड़ी मछलियों को बचा रही सरकार: दीपक बैज"

“छोटी मछलियों का शिकार, बड़ी मछलियों को बचा रही सरकार: दीपक बैज”

रायपुर। भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले में निलंबित पटवारी सुरेश मिश्रा की आत्महत्या के मामले ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। इस मामले में छत्तीसगढ़ पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने CBI या ED से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “बड़ी मछलियों को बचाने के लिए सरकार छोटी मछलियों को बलि का बकरा बना रही है।”

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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज

🔹 बैज का आरोप: “मौत है या हत्या – यह जांच का विषय है”

दीपक बैज ने कहा कि इस मामले में जो सुसाइड नोट बरामद हुआ है, वह इस ओर इशारा करता है कि बड़े अफसरों और बीजेपी नेताओं की भूमिका संदिग्ध है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में करवाई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।


📝 पटवारी सुरेश मिश्रा ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखी बातें

बताया जा रहा है कि निलंबित पटवारी सुरेश मिश्रा ने अपनी बहन के फार्महाउस (ग्राम जोंकी) में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सकरी पुलिस को मौके पर मिला सुसाइड नोट यह संकेत देता है कि मिश्रा खुद को निर्दोष मानते थे।
मृतक पटवारी अयोध्या नगर का निवासी था। घटना के दिन वह बहन के फार्महाउस गया था और जब काफी देर तक वापस नहीं लौटा, तब परिजनों को उसकी लाश पंखे से लटकी मिली।


🔸 राशन कार्ड सत्यापन पर भी बोले बैज

दीपक बैज ने PDS सिस्टम में राशन कार्ड और KYC लिंकिंग की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि:

“राज्य में अभी भी 30 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों का सत्यापन नहीं हुआ है। ऐसे में अंतिम 3 दिनों में सभी कार्डधारियों का सत्यापन कर पाना संभव नहीं है।”

उन्होंने चेताया कि इस अव्यवस्था के चलते गरीब हितग्राही राशन से वंचित हो सकते हैं।


🏛️ मानसून सत्र में कांग्रेस करेगी सरकार को घेरने की तैयारी

14 जुलाई से शुरू होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर भी दीपक बैज ने सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सदन में निम्नलिखित मुद्दे ज़ोरदार ढंग से उठाएगी:

  • कानून व्यवस्था

  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई

  • रेत खनन में अनियमितता

  • जनहित से जुड़े अन्य प्रश्न

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ेगी।


📌 निष्कर्ष

पटवारी आत्महत्या मामला अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। CBI या ED जांच की मांग और हाईकोर्ट निगरानी की मांग से यह मामला और गहराता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।

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