ताज़ा खबर: एशियाई खेलों के लिए सर्वश्रेष्ठ टीमों की मांग
खेल मंत्रालय ने हॉकी इंडिया से एशियाई खेलों के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ टीमों का नामांकन करने की अपील की है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब विश्व कप और एशियाई खेलों के बीच खिलाड़ियों के थकावट को लेकर चर्चाएँ जारी हैं।
हॉकी की चुनौती
विश्व कप, जो कि 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड में आयोजित होगा, और एशियाई खेल, जो कि 19 सितम्बर से 4 अक्टूबर तक जापान के आइची-नागोया में होगा, इन दोनों आयोजनों के बीच समय की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।
हालांकि, ये दोनों प्रतियोगिताएँ एक-दूसरे में टकराती नहीं हैं, परंतु खिलाड़ियों के लिए तैयार होने का समय कम है। इस मुद्दे पर पुरुषों के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन और महिला टीम की कोच स्जोर्ड मरिज़ीन सहमत नहीं हैं। उनका मानना है कि दोनों आयोजनों के लिए एक ही टीम जानी चाहिए।
मंत्रालय की स्थिति
मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, "आईडियल परिस्थिति में दो टीमें होनी चाहिए और ए टीमों को एशियाई खेलों के लिए भेजना चाहिए क्योंकि यह ओलंपिक क्वालीफायर है।"
खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय संघों को पहले ही सूचित किया है कि उन्हें प्रतियोगिताओं के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक बी टीम तैयार रखनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हॉकी में हमें खिलाड़ियों की कमी नहीं है, इसलिए अलग-अलग टीमें तैयार रखना संभव है।"
ओलंपिक का सपना
एशियाई खेलों में पुरुष और महिला दोनों प्रतियोगिताओं के स्वर्ण पदक विजेताओं को 2028 के लॉस एंजेल्स ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया जाएगा। विश्व कप एक महत्वपूर्ण प्रतियोगिता है, और फुल्टन तथा मरिज़ीन हाई-इंटेंसिटी के परिणाम प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं, खासकर पिछले सीज़न में चुनौतीपूर्ण समय के बाद।
हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह ने पीटीआई से कहा, "हम एशियाई खेलों और विश्व कप दोनों में सर्वश्रेष्ठ टीम भेजेंगे। अभी तक हमने टीमों का चयन नहीं किया है, हम सभी कारकों को ध्यान में रख रहे हैं।"
थकावट की समस्या
पारंपरिक रूप से, हर साल कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई खेलों के निकट होने पर खिलाड़ियों के थकावट के मुद्दे उठते हैं। हालांकि, अगले कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन ग्लासगो में हो रहा है, जिसमें हॉकी सहित कई प्रमुख खेलों को शामिल नहीं किया गया है।
इस प्रकार, हॉकी इंडिया को अब इस चुनौती का सामना करना होगा कि कैसे दोनों प्रतियोगिताओं के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन किया जाए, ताकि उनकी थकावट की समस्या को न्यूनतम किया जा सके।
यह देखना दिलचस्प होगा कि मंत्रालय की दिशा को देखकर हॉकी इंडिया अपनी टीमों का चयन कैसे करता है। समय की कमी और प्रदर्शन के दबाव में संतुलन स्थापित करना एक बड़ा प्रश्न बन गया है।
